राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
भाई भतीजाबाद राजनीति में अभिशाप एवं धार्मिक क्षेत्र में वरदान है मुनि श्रमण सागर जी
राघौगढ़ 29 सितंबर। आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महा तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ में विद्यासागर भवन में भाई भतीजा बाद विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा भाई भतीजा बाद की गंदगी में परिवार, समाज, देश का विकास अवरुद्ध हो रहा है। इस महत्वाकांक्षी दुष्प्रवृत्ति से प्रतिभाओं की उपेक्षा होती है, योग्यता कुंठित होती है। परिवार हो, समाज हो या राजनीतिक क्षेत्र में हो अपने परिजनों को उपकृत करने के लिए उनमें योग्यता नहीं होने पर भी उन्हें लाभ दे देते हैं। ऐसे उदाहरण एक नहीं हजारों हैं। मुनिराज ने कहा भाई भतीजा बाद परिवार समाज एवं राष्ट्र के लिए अभिशाप है, इसके विपरीत भाई भतीजा बाद धार्मिक क्षेत्र में वरदान माना गया है। आपने जैन धर्म का उदाहरण देते हुए कहा प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के पिता नाभिराय कुलकर महापुरुष थे, उनके प्रथम पुत्र भरत चक्रवर्ती थे, द्वितीय पुत्र बाहुबली थे, प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के पौत्र एवं भरत चक्रवर्ती के सुपुत्र मारीचि ही जैन धर्म के 24 में तीर्थंकर भगवान महावीर बने। भगवान आदिनाथ की दो पुत्रियां थी ब्राह्मी एवं सुंदरी, ब्राह्मी के नाम पर ब्राह्मी लिपि का प्रचलन हुआ। आपने इस सदी के महान संत आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा उनका जन्म सदलगा कर्नाटक में हुआ था वे विद्याधर से विद्यासागर बने। उनके पिता मल्लप्पा जी ने भी मुनि दीक्षा ली। माताजी श्रीमती ने आर्यिका का दीक्षा ली। उनके छोटे भाई वर्तमान में आचार्य समय सागर जी हैं उनके ही भाई मुनि योग सागर जी निर्यापक मुनि हैं, दो बहने भी आर्यिका बनी। उनके सबसे छोटे भाई भी आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित होकर वर्तमान में मुनि उत्कृष्ट सागर हैं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा उनके स्वयं के साथ उनके भाई को भी आचार्य गुरुवर ने मुनि दीक्षा दी वे वर्तमान में मुनि औचित्य सागर हैं और आचार्य समय सागर जी के साथ भोपाल में चतुर्मासरत हैं। इसी प्रकार उनके छोटे भाई ने भी मोक्ष मार्ग में बढ़ने की इच्छा व्यक्त की है। आपने आगे कहा धर्म के क्षेत्र में राजनीति नहीं होना चाहिए। राजनीति के क्षेत्र में धर्म होना चाहिए। एक जमाना था जब चलते युद्ध में शंख बजता था तो युद्ध बंद हो जाता था। युद्ध में यह नियम था कि महिला, निहत्थे सहित, किसी की पीठ पर बार नहीं करते थे। दिन भर जिनसे युद्ध चलता था, शाम होते ही उनके टेंट में पहुंचते थे घावों पर मल्हम लगाते थे। आपने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के कथन का उल्लेख करते हुए कहा स्वस्थ राजनीति के लिए विपक्ष मजबूत होना चाहिए। मगर यह परंपरा समाप्त सी हो रही है। सत्ता दल एवं विपक्ष एक दूसरे की टांग खींचने में लगे हुए हैं। यह स्वस्थ राजनीति का प्रतीक नहीं है। अपने प्रेरणा दी अन्य क्षेत्रों से भाई भतीजा बाद को समाप्त कर धर्म क्षेत्र में आत्म कल्याण के लिए आगे बढ़ाने के लिए भाई भतीजा बात को प्रोत्साहित करें।
