उत्तम सत्य धर्म पर मंगल प्रवचन
अहिंसा का पालन करने असत्य बोलना समयोचित बताया है। मुनि श्रमण सागर जी
राघौगढ़ 20 सितंबर जैन धर्म के दस लक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म पर मंगल प्रवचन करते हुए विद्या कुल शिरोमणि, महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा विपरीत परिस्थिति में किसी जीव की रक्षा करने अगर आप सत्य को छुपा कर बोलते हैं तो वह भी सत्य ही है। जैन धर्म में पांच अनुव्रतों का उल्लेख है अहिंसा सत्य अचौर्य, ब्रम्हचर्य एवं परिग्रह। इनमें चार अनुव्रतों का पालन करने सत्य धर्म का पालन करना आवश्यक है। आपने उदाहरण देते हुए कहा एक शिकारी के हाथ में मुट्ठी में एक जिंदा चिड़िया थी उस शिकारी ने एक व्यक्ति से पूछा मेरे हाथ में चिड़िया जिंदा है या मृत है। उसने चिड़िया की रक्षा करने कह दिया तेरी मुट्ठी में तो मरी हुई चिड़िया है। शिकारी ने मुट्ठी खोलकर दिखाई की चिड़िया मरी नहीं है जिंदा है। मुट्ठी खोलते ही वह चिड़िया उड़ गई और इस तरह से उसे व्यक्ति ने जीव रक्षा की। विपरीत परिस्थिति में सत्य को छुपा कर झूठ बोलना भी सत्य ही है
मुनिराज ने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के कथनों का उल्लेख करते हुए कहा
कम बोलो, सोच समझ कर बोलो, बहुत जरूरी हो तब बोलो, ज्यादा बोलोगे तो सत्य धर्म का पालन नहीं होगा असत्य बोलने का पाप लगेगा। वाणी को वीणा बनाओ वाण नहीं। चोट के घाव तो भर जाते हैं। मगर मुंह से बोले कटु वचनों के घाव जीवन भर नहीं भरते हैं। आपने विशेष रूप से उल्लेख किया आचार्य कुंदकुंद स्वामी द्वारा रचित कुरल काव्य ग्रंथ जिसका दुनिया की 80 भाषाओं में अनुवाद हुआ है इस ग्रंथ को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति श्री विलादिमीर पुतिन को भेंट किया है। कुरल काव्य एक ग्रंथ ही नहीं, नीति शास्त्र है। रूस के राष्ट्रपति को यह ग्रंथ भेंट किए जाने से जैन धर्म का गौरव बड़ा है। आपने जीवन में मधुर वचन बोलने की प्रेरणा दी। यह भी उल्लेख किया दुनिया में घाव को भरने के लिए हल्दी लगाई जाती है। विवाह भी ऐसा जख्म है जिसमें हल्दी लगाई जाती है।
मनीष शर्मा सागर जी महाराज ने स्वरचित बुंदेली कविता सुनाई जिसका शीर्षक है "अपन ने तो कहवो छोड़ दयो"।
