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विश्व रेबीज दिवस पर जिलेभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

 विश्व रेबीज दिवस पर जिलेभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित


गुना 

कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर के मार्गदर्शन में विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर जिलेभर में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य संस्थानों, स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान रेबीज से बचाव, इसके लक्षण एवं टीकाकरण के संबंध में जानकारी दी गई।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार ऋषिश्‍वर ने बताया कि प्रत्येक वर्ष 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर आमजन को रेबीज से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जाता है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले तो काटे गए स्थान को तुरंत बहते हुए साफ पानी से लगभग 15 मिनट तक धोना चाहिए और इसके बाद नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार टीकाकरण कराना चाहिए। समय पर उपचार एवं टीकाकरण से रेबीज से बचाव किया जा सकता है।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि कुत्तों के पास जाते समय सावधानी बरतें। कुत्ता पास आए तो शांत रहें, एक स्थान पर खड़े रहें और भागें नहीं। कुत्तों को मारें या परेशान न करें। यदि वाहन चलाते समय कुत्ता पीछा करे तो वाहन की गति धीमी कर लें। कुत्तों को देखकर भागने से बचें। कुत्ते के सोते समय, पिल्लों के साथ रहने या खेलते समय, भोजन करते समय, पिल्लों को दूध पिलाते समय अथवा डरे या आक्रामक अवस्था में होने पर उसे परेशान नहीं करना चाहिए।

रेबीज संक्रमित जानवर की लार के संपर्क में आने से फैल सकता है। कुत्ते रेबीज के प्रमुख वाहकों में शामिल हैं, लेकिन अन्य संक्रमित स्तनधारी जानवरों के माध्यम से भी इसका संक्रमण हो सकता है। 

रेबीज एक गंभीर एवं जानलेवा बीमारी है। लक्षण प्रकट होने के बाद इसका उपचार अत्यंत कठिन हो जाता है, इसलिए संभावित संक्रमण की स्थिति में तत्काल घाव की सफाई कर स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकीय परामर्श लेना आवश्यक है। केवल जानवर के व्यवहार के आधार पर उसके रेबीज से संक्रमित होने का पता नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि संक्रमित जानवरों के व्यवहार में अलग-अलग प्रकार के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि पालतू जानवरों का समय पर रेबीज रोधी टीकाकरण कराना भी आवश्यक है। इससे पालतू पशुओं को रेबीज से बचाने के साथ-साथ मनुष्यों में संक्रमण के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलती है।

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