
नई दिल्ली । अब तक तो आम धारणा यही रही है कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण तभी खतरनाक स्तर पर पहुंचता है, जब पराली जलाई जाती है या फिर दीपावली आती है। मौजूदा समय में न तो पराली जल रही और न ही दीपावली है। बावजूद इसके वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक बना हुआ है।
केंद्र और राज्य सरकारों ने कागजी घोड़े जरूर खूब दौड़ाए
इसके पीछे जो बड़ी वजहें हैं, वह वाहनों, उद्योगों आदि से होने वाला उत्सर्जन और मौसम की खराब स्थिति है। मौसम को लेकर तो कुछ किया नहीं सकता, लेकिन अलग-अलग माध्यमों से होने वाले उत्सर्जन में कमी जरूर लाई जा सकती है। जिन्हें इस काम की जवाबदेही सौंपी गई है, वे सभी ऐसा कर पाने में नाकाम हैं। केंद्र और राज्य सरकारों ने कागजी घोड़े जरूर खूब दौड़ाए। केंद्र ने तो दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता को बेहतर रखने के लिए एक आयोग का ही गठन कर दिया है। केंद्र और राज्य सरकारों ने अपने-अपने स्तर पर वाहनों, उद्योगों आदि से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने के लिए भारी-भरकम टीमें भी तैनात की हैं, पर मौजूदा स्थिति से साफ है कि वायु प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए किए गए उपाय जमीनी हकीकत से दूर ही रहे।
जिम्मेदार एजेंसियां अपनी जवाबदेही निभाने में हुईं विफल
अभी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का जो स्तर है, वह एयर क्वालिटी इंडेक्स में चार सौ के करीब है जो खतरनाक श्रेणी में आता है। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय के पूर्व सचिव सीके मिश्र के मुताबिक निश्चित ही इस सीजन में बढ़ा हुआ वायु प्रदूषण चिंता की बात है, लेकिन इसके पीछे बड़ी वजह मौसम है। इस स्थिति से तुरंत राहत सिर्फ तेज हवाओं के चलने या फिर बारिश से मिल सकती है। पर वायुमंडल में मौजूद जिन कणों के चलते प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है, उसके कारणों से निपटने की जरूरत है। इनमें वाहन, उद्योगों, निर्माण कार्य और कचरे के जलने से होने वाला प्रदूषण आदि शामिल है। हालांकि, इस दिशा में काफी काम हुआ है, पर जो परिणाम दिख रहे हैं, वे सिर्फ वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कुछ सुधार हुआ है। जबकि, अवैध तरीके से चलने वाले उद्योग बंद होने चाहिए।
उत्सर्जन में कमी लाना प्राथमिकता
वहीं, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पूर्व सदस्य व वरिष्ठ वैज्ञानिक दीपांकर साहा के मुताबिक जो हमारे हाथ में है, वह अलग-अलग तरीके से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाकर हवाओं को जहरीली होने से बचाने का उपाय है। ऐसे में हमें सिर्फ उत्सर्जन को कम करने की दिशा में ही काम करना चाहिए।
