राघोगढ़ के ऐतिहासिक 'रामलला मंदिर' में 201वें स्थापना वर्ष पर भव्य राम-जानकी कल्याण महोत्सव संपन्न
विधायक जयवर्धन सिंह ने प्रभु रामलला की महाआरती कर अनुष्ठान में लिया भाग
राघोगढ़, गुना।
ऐतिहासिक नगर राघोगढ़ की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक, 201 वर्ष प्राचीन 'रामलला मंदिर' में नवरात्रि एवं रामनवमी के पावन अवसर पर आयोजित विशेष अनुष्ठान हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुए। वर्ष 1825 में राज दीवान परिवार द्वारा निर्मित इस भव्य मंदिर की स्थापना के 201 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित 'राम-जानकी कल्याण महोत्सव' ने संपूर्ण नगर को भक्तिमय कर दिया।
वैदिक परंपराओं का अद्भुत संगम
इस गौरवशाली अवसर पर तिरुपति के प्रख्यात संत श्री उमाशंकर त्रिपाठी जी के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। संपूर्ण आयोजन के दौरान भारतीय पद्धति और प्राचीन वैदिक परंपराओं का अक्षरशः पालन किया गया। नवरात्रि के दौरान आयोजित रुद्र चंडी महायज्ञ की दिव्यता और मंत्रोच्चार से क्षेत्र का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
विधायक जयवर्धन सिंह ने की शिरकत
महोत्सव के विशेष सत्र और राम-जानकी कल्याण महोत्सव के कार्यक्रमों में क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री श्री जयवर्धन सिंह जी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। श्री सिंह ने मंदिर के गर्भगृह में विराजमान प्रभु रामलला और माता जानकी की विशेष महाआरती की और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने पूरे उत्साह के साथ धार्मिक अनुष्ठान में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
राज दीवान परिवार की समर्पित सेवा और प्रबंधन
वर्तमान में इस प्राचीन मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना श्री नितिन वत्स द्वारा पूर्ण निष्ठा के साथ की जा रही है। मंदिर की भव्यता को बनाए रखने, इसके प्रबंधन और रख-रखाव में श्री सचिन वत्स एवं श्री राहुल वत्स का विशेष रूप से सक्रिय योगदान रहता है। पूरा राज दीवान परिवार अपनी इस अनमोल विरासत को संभालने और सहेजने में पूरी श्रद्धा के साथ समर्पित है।
201 वर्षों की अटूट आस्था
ज्ञात हो कि 1825 में निर्मित यह रामलला मंदिर अपनी भव्यता और प्राचीनता के लिए पूरे अंचल में विख्यात है। तिरुपति से आए संतों के मार्गदर्शन में हुए इन अनुष्ठानों ने दक्षिण और उत्तर की भक्ति धाराओं का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। आयोजन के दौरान राज दीवान परिवार के सदस्यों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, गणमान्य नागरिक और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।



