मंदसौर। नगरवासियों को जिस शुभ घडी का इंतजार था वह मंगलवार को आई ही गई। मंगलवार को नगर के नयापुरा रोड स्थित माहेश्वरी धर्मशाला में संत श्री चिन्मयानन्दजी बापू की 523वीं कथा प्रारंभ हुई। विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट मंदसौर शाखा द्वारा कथा का आयोजन करवाया जा रहा है। कथा के प्रथम दिन अतिथि के रूप में अनिता दीदी गुरू, नपाध्यक्ष रमादेवी गुर्जर, नपा उपाध्यक्ष नम्रता चावला, रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष प्रितेश चावला, नपा लोकनिर्माण सभापति निर्मला चंदवानी, भाजपा मंडल अध्यक्ष अरविन्द सारस्वत, नरेश चंदवानी, अनिल कियावत उपस्थित रहें। सभी अतिथियों ने बापूजी से आशीर्वाद प्राप्त कर आरती उतारी।
धर्मसभा में पपू संतश्री चिन्मयानन्दजी बापू ने कहा कि इस संसार को राम और राम के नाम दोनों की आवश्यकता है राम के बिना इस संसार की कल्पना तक नहीं कि जा सकती है। आपने कहा कि उम्र के हर मोड पर रामकथा श्रवण करना चाहिए बाल्यावस्था हो या युवावस्था या फिर वृद्धा अवस्था हर उम्र में रामकथा हमंे अलग सीख प्रदान करती है और जीवन जीने का तरीका बताती है। भगवान श्रीराम का पूरा जीवन ही एक आदर्श है हम यदि उनके चरित्र का एक प्रतिशत भी पालन कर अपने जीवन में उतार लें तो हमार जीवन धन्य हो जायें।
धर्मसभा में संतश्री ने कहा कि हमारा सांसारिक जीवन भी समु्रद्र की भांति होता है जिस प्रकार समुद्र स्थिर रहता है उसी प्रकार जीवन भी स्थिर है लेकिन समुद्र में ज्वारभाटे आते है उसी प्रकार जीवन में कई प्रकार की समस्याएं कठिनाईयां आती है जिन्हें हम रामकथा श्रवण कर दूर कर सकते है। संतश्री ने कहा कि हमें श्रीराम को समझना चाहिए उसके बाद दूसरे भगवान को आसानी से समझा जा सकता है। यदि हम श्रीकृष्ण को सीधे समझने की कोशिश करेंगे तो रास्ते से भटक जायेंगे क्योंकि श्रीकृष्ण का जीवन लीलाओं से भरा है इसलिए हमें पहले भगवान राम को समझने का प्रयास करना चाहिए।
संगीतमय हो रही है रामकथा
माहेश्वरी धर्मशाला में चिन्मयानन्दजी बापू के मुखारबिन्द से चल रही रामकथा संगीतमय हो रही है। रामकथा के बीच मे बापू जी स्वयं संगीत मय वाद्ययंत्रों के साथ भजनों को गाते है जिससे रामकथा श्रवण का आनन्द दुगुना हो जाता है।
चंद्रकांता माताजी की इच्छा प्रबल रही
धर्मसभा में संतश्री चिन्मयानन्दजी बापू ने कहा कि मंदसौर में मेरी कथा का अभी कोई प्लान नहीं था। अचानक से एक कथा किसी कारणवश निरस्त हुई और मेरी कथा का मंदसौर में योग बन गया। जिसके पीछे आयोजन समिति के अनिल गुप्ता की माताजी चंद्रकांता गुप्ता का भी विशेष योगदान रहा जो 100 वर्ष की आयु में भी कथा करवाने की इच्छुक रही और प्रभु ने भी उनकी प्रार्थना स्वीकार की।
रामकथा में अनिल गुप्ता, नरेन्द्र अग्रवाल, विनय दुबेला, मयंक वैद्य, आशीष गुप्ता, योगेश गुप्ता, टीटू गुप्ता, रमेशचंद्र चंद्रे, विनय दूबेला, बाबा पंचोली, दिनेश तिवारी, विश्वमोहन अग्रवाल, अनूप माहेश्वरी, गोपाल राजावत, योगेश जोशी, शैलेन्द्र सिंह राठौर, रविन्द्र पाण्डेय, अरूण शर्मा, बंशीलाल टांक, हिंमाशु गुप्ता, बिन्दू चंद्रे, गरीमा भाटी पार्षद, रेखा सोनी पार्षद, आशा अग्रवाल, विद्या उपाध्याय, निर्मला गुप्ता, सुमन गुप्ता, रश्मिी गुप्ता, अर्चना गुप्ता, शारदा रजवानियां, सुनिता भावासार सहित बडी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।
धर्मसभा में पपू संतश्री चिन्मयानन्दजी बापू ने कहा कि इस संसार को राम और राम के नाम दोनों की आवश्यकता है राम के बिना इस संसार की कल्पना तक नहीं कि जा सकती है। आपने कहा कि उम्र के हर मोड पर रामकथा श्रवण करना चाहिए बाल्यावस्था हो या युवावस्था या फिर वृद्धा अवस्था हर उम्र में रामकथा हमंे अलग सीख प्रदान करती है और जीवन जीने का तरीका बताती है। भगवान श्रीराम का पूरा जीवन ही एक आदर्श है हम यदि उनके चरित्र का एक प्रतिशत भी पालन कर अपने जीवन में उतार लें तो हमार जीवन धन्य हो जायें।
धर्मसभा में संतश्री ने कहा कि हमारा सांसारिक जीवन भी समु्रद्र की भांति होता है जिस प्रकार समुद्र स्थिर रहता है उसी प्रकार जीवन भी स्थिर है लेकिन समुद्र में ज्वारभाटे आते है उसी प्रकार जीवन में कई प्रकार की समस्याएं कठिनाईयां आती है जिन्हें हम रामकथा श्रवण कर दूर कर सकते है। संतश्री ने कहा कि हमें श्रीराम को समझना चाहिए उसके बाद दूसरे भगवान को आसानी से समझा जा सकता है। यदि हम श्रीकृष्ण को सीधे समझने की कोशिश करेंगे तो रास्ते से भटक जायेंगे क्योंकि श्रीकृष्ण का जीवन लीलाओं से भरा है इसलिए हमें पहले भगवान राम को समझने का प्रयास करना चाहिए।
संगीतमय हो रही है रामकथा
माहेश्वरी धर्मशाला में चिन्मयानन्दजी बापू के मुखारबिन्द से चल रही रामकथा संगीतमय हो रही है। रामकथा के बीच मे बापू जी स्वयं संगीत मय वाद्ययंत्रों के साथ भजनों को गाते है जिससे रामकथा श्रवण का आनन्द दुगुना हो जाता है।
चंद्रकांता माताजी की इच्छा प्रबल रही
धर्मसभा में संतश्री चिन्मयानन्दजी बापू ने कहा कि मंदसौर में मेरी कथा का अभी कोई प्लान नहीं था। अचानक से एक कथा किसी कारणवश निरस्त हुई और मेरी कथा का मंदसौर में योग बन गया। जिसके पीछे आयोजन समिति के अनिल गुप्ता की माताजी चंद्रकांता गुप्ता का भी विशेष योगदान रहा जो 100 वर्ष की आयु में भी कथा करवाने की इच्छुक रही और प्रभु ने भी उनकी प्रार्थना स्वीकार की।
रामकथा में अनिल गुप्ता, नरेन्द्र अग्रवाल, विनय दुबेला, मयंक वैद्य, आशीष गुप्ता, योगेश गुप्ता, टीटू गुप्ता, रमेशचंद्र चंद्रे, विनय दूबेला, बाबा पंचोली, दिनेश तिवारी, विश्वमोहन अग्रवाल, अनूप माहेश्वरी, गोपाल राजावत, योगेश जोशी, शैलेन्द्र सिंह राठौर, रविन्द्र पाण्डेय, अरूण शर्मा, बंशीलाल टांक, हिंमाशु गुप्ता, बिन्दू चंद्रे, गरीमा भाटी पार्षद, रेखा सोनी पार्षद, आशा अग्रवाल, विद्या उपाध्याय, निर्मला गुप्ता, सुमन गुप्ता, रश्मिी गुप्ता, अर्चना गुप्ता, शारदा रजवानियां, सुनिता भावासार सहित बडी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।


