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वीर हनुमान पुरस्कार से सम्मानित हुये प्रशिक्षक अशोक साहू

 वीर हनुमान पुरस्कार से सम्मानित हुये प्रशिक्षक अशोक साहू



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


रायपुर - कयाकिंग एवं कैनोइंग खेल के अनुभवी एवं समर्पित प्रशिक्षक अशोक कुमार साहू वर्तमान में जगदलपुर में कयाकिंग एवं कैनोइंग कोच के रूप में कार्यरत हैं। इन्होंने लम्बे समय से खिलाड़ियों को निरंतर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हुये छत्तीसगढ़ में कयाकिंग एवं कैनोइंग खेल के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इनका समर्पण , मेहनत एवं कयाकिंग-कैनोइंग खेल के प्रति निरंतर योगदान छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों के लिये प्रेरणादायक है। इनके उत्कृष्ट योगदान , समर्पण एवं खेल के प्रति निरंतर सेवाओं को देखते हुये इन्हें वर्ष 2024–25 में प्रशिक्षक वर्ग के प्रतिष्ठित “वीर हनुमान पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार इनको मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं खेल मंत्री अरूण साव के कर-कमलों से प्रदान किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कयाकिंग एवं कैनोइंग संघ की ओर से  वल्लभे सिंह भाटिया , अभिजीत मिश्रा , प्रशांत सिंह रघुवंशी , सुश्री पिंकी साहू ने अशोक को हार्दिक बधाई एवं बहुत-बहुत शुभकामनायें प्रेषित की है। मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने के बाद अशोक साहू ने मीडिया से चर्चा करते हुये अरविन्द तिवारी को बताया कि वे श्रीराम चौक भाटागांव (रायपुर) के मूल निवासी हैं। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई और अभी स्नातक (द्वितीय वर्ष) तक पढ़ाई किये हैं। गांव में दूसरे खिलाड़ियों को देखकर इनको कयाकिंग एवं कैनोइंग में जाने की प्रेरणा मिली।‌ वर्ष 2007 मे कयाकिंग एवं कैनोइंग प्रशिक्षण की शुरुआत इन्होंने खारु नदी महादेव घाट नया बांध में की , उसके बाद वर्ष 2008 में सबसे पहले बेंगलुरु नेशनल में इन्होंने भाग लिया। इनका दूसरा नेशनल वर्ष 2009 में भीमताल नैनीताल में हुआ था , जिसमें ये फाइनल में पहुंचे थे। इन्होंने सब जूनियर में वर्ष 2010 और 2011 में बेंगलुरु में नेशनल दो कांस्य और वर्ष 2012 मणिपुर में एक रजत कांस्य पदक हासिल किये थे। भोपाल सीनियर नेशनल चैंपियनशिप वर्ष 2014 में सीनियर वर्ग भी इन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था। फिर सभी बच्चों को ट्रेनिंग देने के साथ - साथ में भी प्रैक्टिस करता था और फिर इनको वर्ष 2016 में शहीद पंकज विक्रम पुरस्कार सम्मानित किया गया। इनके द्वारा प्रशिक्षित बच्चे भी हर साल मेडल के साथ - साथ नेशनल गेम में भी मेडल हासिल कर चुके हैं। इन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने मम्मी - पापा और भाई को देते हुये अपने लक्ष्य के बारे में कहा कि इनका लक्ष्य भविष्य में अच्छा खिलाड़ी तैयार करना है ताकि बच्चे ओलंपिक एशियन गेम कॉमनवेल्थ पदक जीतकर प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकें।

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