रक्षाबंधन महामंडल विधान का समापन
Raghogarh-धर्म राष्ट्र, धर्मायतनों, समाज एवं परिवार की सुरक्षा का आज संकल्प लें। मुनि श्रमण सागर राघौगढ़ 28 अगस्त। ऐतिहासिक धर्म नगरी राघौगढ़ में चार दिन से चल रहे श्री रक्षाबंधन महामंडल विधान के समापन दिवस पर श्रमण धारा प्रवचन माला के अंतर्गत प्रवचन करते हुए मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने आव्हान किया आज का दिन जैन धर्म के अनुसार पवित्र एवं पावन दिवस है आज ही के दिन लाखों वर्ष पूर्व हस्तिनापुर में श्री अकामनाचार्य आदि 700 मुनि राजों की उपसर्ग के से रक्षा मुनि विष्णु कुमार ने की थी। आपने कहा आज का दिन भाई के हाथ में बहन को राखी बांधकर इस रश्म में ही सिमट गया है। आज हमें संकल्प लेना चाहिए कि हमारी तीन संतानें हों एक राष्ट्र की रक्षा करने वाला देश भूषण हो, दूसरा धर्म एवं धर्मायतनों की रक्षा करने वाला धर्म भूषण हो, तीसरा परिवार को सुसंस्कृत बनाकर परिवार को चलाने वाला कुलभूषण हो।
संघस्थ मुनि ओंकार सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा हस्तिनापुर नगर में लाखों वर्ष पूर्व 700 मुनि राजों पर राजा बलि के संरक्षण में अधर्मी आततायियों उपसर्ग किया था। उसे समय विष्णु कुमार मुनि ने विक्रिया ऋद्धि से राजा बलि से तीन पग भूमि मांग कर और तीसरा पग राजा बलि की पीठ पर रखकर मुनि राजों का उपसर्ग दूर कराया था। इस पावन रक्षा दिवस को जैन धर्म में धर्म रक्षा दिवस अथवा रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है।
पिछले 4 दिन से चल रहे श्री रक्षाबंधन महामंडल विधान का आज रक्षाबंधन पर्व एवं भगवान श्रेयांश नाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक दिवस पर भक्ति भाव एवं धर्म आराधना से हुआ। प्रातः 6:00 बजे से भगवान का अभिषेक शांति धारा एवं पूजन हुई। विधान की बड़ी जयमाला जिसमें सभी 700 मुनि राजों को स्मरण कर अर्घ चलाए गए। भगवान श्रेयांश नाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक पर सामूहिक रूप से निर्माण लाडू भी चढ़ाया गया। तत्पश्चात बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य तरुण भैया जी इंदौर के निर्देशन में सभी को अभिमंत्रित धर्म रक्षा सूत्र बांधे गए। रक्षा सूत्र बांधने के अवसर पर सभी को संकल्प दिया दिलाया कि हम हमारे धर्म गुरुओं धर्मायतनों एवं राष्ट्र की सुरक्षा करेंगे।हवन शांति के माध्यम से सभी श्रद्धालुओं ने आहुतियां दी। भोपाल से सपरिवार पधारे राघौगढ़ के ही धर्मानुरागी, संत सुधा सागर धाम राघौगढ़ में श्री संभवनाथ जिनालय के पुण्यार्जक परिवार के सिंघई राजेश भारिल्य ने सपरिवार विधान में अर्घ चढ़ाया। निर्माण लाडू चढ़ाया। राघौगढ़ नगर में चातुर्मास कर रहे दोनों मुनिराज का पद प्रच्छालन कर आशीर्वाद लिया।
