प्रियांशी नायक ने बनाई आकर्षक इको-फ्रेंडली गणेश की मूर्ति
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायगढ़ - गणेश उत्सव के पावन अवसर पर प्रियांशी नायक (19 वर्षीया) ने आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने बाजार से मूर्ति खरीदने के बजाए , पर्यावरण संरक्षणक्षण का संदेश देते हुये अपने घर पर ही शुद्ध मिट्टी से एक बेहद आकर्षक और मनमोहक भगवान गणेश की मूर्ति स्वयं बनाई है। पूरी तरह शुद्ध मिट्टी से बनी यह मूर्ति लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उनकी बनाई हुई इस सुंदर मूर्ति की रिश्तेदारी , मोहल्ले और सोशल मीडिया पर खूब सराहना हो रही है। दस दिवसीय गणेशोत्सव में प्रतिदिन विधिवत पूजा पाठ कर अनंत चतुर्दशी के दिन महाआरती के साथ इनका विसर्जन किया जायेगा। इस संबंध में मीडिया से चर्चा करते हुये प्रियांशी ने अरविन्द तिवारी को बताया कि उन्होंने कभी कहीं से ड्राइंग , पेंटिंग का प्रशिक्षण नही लिया है , बल्कि अपने रचनात्मक कौशल की मदद से लगभग एक सप्ताह की मेहनत से रूई , मिट्टी और पेपर के सहयोग से यह मूर्ति तैयार की है। मूर्ति को पूरी तरह से प्राकृतिक रंगों और मिट्टी से बनाया गया है , ताकि विसर्जन के बाद यह आसानी से पानी में घुल जाये और पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंचाये। उन्होंने कहा कि मेरा उद्देश्य सिर्फ मूर्ति बनाना नहीं था , बल्कि लोगों को यह संदेश देना था कि हम अपनी परंपराओं को पर्यावरण की रक्षा करते हुये भी निभा सकते हैं। अपने हाथों से बप्पा को बनाकर जो खुशी और शांति मिली , वो बाजार की मूर्ति में नहीं मिल सकती। प्रियांशी का कहना है कि सभी को प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह मिट्टी के गणेश की स्थापना करनी चाहिये , उनकी यह पहल अन्य युवाओं के लिये भी प्रेरणा बन रही है। गौरतलब है कि प्रियांशी नायक जांजगीर चाम्पा जिले के ग्राम धौराभांठा की मूल निवासी है , इनके पिता लाल कुमार नायक (पतंजलि आरोग्य केंद्र , मां चंद्रहासिनी ऑटोमोबाइल , श्री बाजार रायगढ़) और माताजी श्रीमती शर्मिला नायक योग टीचर , योगा कोच और योगा स्ट्रक्चर हैं। अपने मम्मी पापा की इकलौती बेटी प्रियांशी ने शुरूआत से हाईस्कूल तक की पढ़ाई डीपीएस स्कूल रायगढ़ और हायरसेकेण्डरी तक की पढ़ाई ए.के. गोयल पब्लिक स्कूल रायपुर से की है। इनको पढ़ाई के अलावा ड्राइंग , पेंटिंग , स्विमिंग , हॉर्स राइडिंग में भी रुचि है। इन्होंने पूर्वजों के आशीर्वाद और भगवान की कृपा से पहली बार गणेशजी की मूर्ति स्वयं से बनाई है। उनको यह प्रेरणा अपने दादाजी स्वर्गीय सिद्धेश्वर सिंह नायक (शिक्षक) से मिली है , जो अपने हाथ से गणेशजी की मूर्ति बनाकर पूजा करते थे और तब से लेकर आज तक लगातार घर में गणेशजी की मूर्ति बिठाकर पूजा की जाती है।
