रायसेन, 06 जनवरी 2022
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में खाली जगह पर पोषण वाटिका तैयार की गई हैं, जिससे बच्चों तथा गर्भवती माताओं को ताजी और पौष्टिक हरी सब्जियां मिल रही है। इन पोषण वाटिकाओं में जैविक रूप से सब्जियां उगाई जा रही है। जिले के समनापुर सेक्टर के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र धनगंवा में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका दोनों ने मिलकर पोषण वाटिका तैयार की है। आंगनबाड़ी केन्द्र पथरीले और मुरमवाली जगह पर होने से पोषण वाटिका बनाना बहुत मुश्किल था लेकिन कार्यकर्ता और सहायिका ने कड़ी मेहनत, लगन से बंजर जैसी जमीन पर पोषण वाटिका तैयार कर दी।
पोषण वाटिका तैयार करने के लिए दोनों स्वयं खेत से मिट्टी लेकर आई तथा उसमें देशी खाद मिलाकर आंगनबाड़ी की खाली पड़ी बेकार और बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया। प्रारंभ में आंगनबाड़ी केन्द्र पर पानी की व्यवस्था नहीं होने पर सहायिका द्वारा कुछ दूरी पर स्थित हैण्डपम्प से पानी लाकर पोषण वाटिका में पौधों को पानी दिया गया। पोषण वाटिका में विभिन्न तरह के लाभकारी पेड़ों सहजन, आंवला, नीबू, अमरुद, करोंदा का रोपड़ किया गया है। इसके साथ ही किचिन गार्डन में पोषणयुक्त सब्जियां तोरई, लौकी, कद्दू, टमाटर, पालक, मैथी, बथुआ इत्यादि का भी रोपड़ किया गया है।
महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक संकत ने बताया कि जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका तैयार की गई हैं, जिससे आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हरी और ताजी सब्जियां मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं को उनके घर या आसपास खाली जमीन पर भी पोषण वाटिका तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि घर में ही ताजी और पौष्टिक हरी सब्जियां मिल सके। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका से हर मौसम में ताजी साग-सब्जी उपलब्ध होती है। बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए ताजे फल मिलते है।
पोषण वाटिका तैयार करने से वातावरण भी हरा-भरा रहता है और वायु का शुद्धिकरण होता है। ताजे फलों और हरी सब्जियों से कमजोर एवं कुपोषित बच्चों के शरीर में सही मात्रा में पोषण तत्वों की भरपाई होती है। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ में वृद्धि होती है। महिलाओं, किशोर-किशोरियों एवं बच्चों को पौष्टिक आहार मिल सके तथा पोषण की कमी ना रहे, इसके लिए पोषण वाटिका बनाई जा रही है। साथ ही महिलाओं, आमजन को स्थानीय स्तर पर पोषण युक्त खाद्य पदार्थो के बारे में जागरुक किया जाता है।
पीआरओ/स0क्र0 49/01-2022
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में खाली जगह पर पोषण वाटिका तैयार की गई हैं, जिससे बच्चों तथा गर्भवती माताओं को ताजी और पौष्टिक हरी सब्जियां मिल रही है। इन पोषण वाटिकाओं में जैविक रूप से सब्जियां उगाई जा रही है। जिले के समनापुर सेक्टर के अंतर्गत आंगनबाड़ी केन्द्र धनगंवा में भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका दोनों ने मिलकर पोषण वाटिका तैयार की है। आंगनबाड़ी केन्द्र पथरीले और मुरमवाली जगह पर होने से पोषण वाटिका बनाना बहुत मुश्किल था लेकिन कार्यकर्ता और सहायिका ने कड़ी मेहनत, लगन से बंजर जैसी जमीन पर पोषण वाटिका तैयार कर दी।
पोषण वाटिका तैयार करने के लिए दोनों स्वयं खेत से मिट्टी लेकर आई तथा उसमें देशी खाद मिलाकर आंगनबाड़ी की खाली पड़ी बेकार और बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया। प्रारंभ में आंगनबाड़ी केन्द्र पर पानी की व्यवस्था नहीं होने पर सहायिका द्वारा कुछ दूरी पर स्थित हैण्डपम्प से पानी लाकर पोषण वाटिका में पौधों को पानी दिया गया। पोषण वाटिका में विभिन्न तरह के लाभकारी पेड़ों सहजन, आंवला, नीबू, अमरुद, करोंदा का रोपड़ किया गया है। इसके साथ ही किचिन गार्डन में पोषणयुक्त सब्जियां तोरई, लौकी, कद्दू, टमाटर, पालक, मैथी, बथुआ इत्यादि का भी रोपड़ किया गया है।
महिला बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री दीपक संकत ने बताया कि जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों में पोषण वाटिका तैयार की गई हैं, जिससे आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हरी और ताजी सब्जियां मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं को उनके घर या आसपास खाली जमीन पर भी पोषण वाटिका तैयार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि घर में ही ताजी और पौष्टिक हरी सब्जियां मिल सके। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका से हर मौसम में ताजी साग-सब्जी उपलब्ध होती है। बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिए ताजे फल मिलते है।
पोषण वाटिका तैयार करने से वातावरण भी हरा-भरा रहता है और वायु का शुद्धिकरण होता है। ताजे फलों और हरी सब्जियों से कमजोर एवं कुपोषित बच्चों के शरीर में सही मात्रा में पोषण तत्वों की भरपाई होती है। गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के स्वास्थ में वृद्धि होती है। महिलाओं, किशोर-किशोरियों एवं बच्चों को पौष्टिक आहार मिल सके तथा पोषण की कमी ना रहे, इसके लिए पोषण वाटिका बनाई जा रही है। साथ ही महिलाओं, आमजन को स्थानीय स्तर पर पोषण युक्त खाद्य पदार्थो के बारे में जागरुक किया जाता है।
पीआरओ/स0क्र0 49/01-2022
