क्या आप जानते हैं: "भगवान कहाँ रहते है??"
एक बार श्री नारद मुनि ने भगवान से पूछा:- हे देवेश्वर आप कहाँ वास करते हैं??
इस पर भगवान ने कहा:- नारद मैं न् तो वैकुंठ में रहता हूँ, न् ही योगियों के ह्रदय में। मेरे भक्त जहां मेरा गुणगान करते हैं, बस मैं वहीं रहता हूँ।
नाहं वसामि वैकुण्ठे योगिनां ह्रदये न् वै।
मद्भक्ता यत्र गायन्ति तत्र तिष्ठामि नारद॥
(पद्मपुराण- उ० ९२/२२)
बस फिर क्या था?? देवऋषि नारद ने उस दिन से एक ही कार्य पकड़ लिया, कि जहां जाएं, जिस किसी से मिलें; भगवान का ही गुणगान करना है।
सोशल मीडिया पर भी आप एक नियम बना लो, किसी भी प्रकार हमें दिन में कम से कम एक बार तो भगवान नारायण का गुणगान गाना ही है और यह संख्या बढ़ते रहनी चाहिए। जहां जाओ, जिस किसी के साथ उठो बैठो, सिर्फ भगवान की चर्चा करो। फिर आप अपने मन मे एक अद्भुत संतोष देखोगे ...
तुम एक बार भगवान में खोकर तो देखो, तुम्हे वह सब कुछ मिल जाएगा, जो तुम चाहते हो। तुम कभी यह भाव मत लाओ, कि तुम अपनी बुद्धि से भगवान को या भगवान से कुछ पा लोगे, क्योंकि भगवान मन बुद्धि से परे हैं और तुम्हारा यह प्रयास व्यर्थ जायेगा।
तुम बस मूर्ख बनकर भोलेपन में तरबतर होकर, भगवान का गुणगान करते रहो ... फिर तुम्हे धीरे धीरे सत्व ही भगवान की कृपा मिलने लगेगी।
और अगर भगवान की कृपा हो गयी, तो वह भक्ति मिलेगी जिस भक्ति की क्षमता वेद भी नही कर सकते।
और सौ बातों की एक बात ... अगर भगवान कहते हैं कि मैं वहीं रहता हूँ, जहां मेरे भक्त मेरा गुणगान करते हैं ... तो भगवान् को हर क्षण ही साथ रखो न .... गाते जाओ उनका यश, उनका गुणगान ... तुम्हारा क्या घटेगा ? कुछ भी नही, करके देख तो लो।
जय जय श्री राधे श्याम! 🌹🙏🏽

