कायस्थ समाज राघौगढ़ ने हर्षोल्लास वा धुमधाम से मनाया भगवान श्री चित्रगुप्त प्रकटोत्सव
राघौगढ़,,
कायस्थ समाज राघौगढ़ ने अपने आराध्य भगवान श्री चित्रगुप्त भगवान का प्रकटोत्सव बैशाख शुक्ल सप्तमी को स्थानीय चित्रगुप्त मंदिर पर बड़े ही हर्षोल्लास वा धुमधाम से मनाया।
सर्वप्रथम भगवान का विशेष सिंगार किया गया इसके पश्चात समाज के युवा, महिलाओं, बच्चों तथा वरिष्ठजनों द्वारा सामूहिक सुंदरकांड का सामूहिक वाचन किया जिससे सम्पूर्ण वातावरण भक्ति में हो गया।
अंत में हवन कर प्रसादी वितरण की गई। शास्त्रों के अनुसार धर्मराज जी ने जब भगवान ब्रह्मा से एक सहायक की मांग की तब काया से भगवान श्री चित्रगुप्त की उत्पत्ति हुई और इसी कारण कायस्थ कहलाये। जो विश्व के सभी व्यक्तियों के पुण्य -पाप का लेखा-जोखा रखते हैं।जो विभिन्न उपजातियां के नाम से संपूर्ण भारत में निवासरत हैं । जिन्हें ही पाप पुण्य का लेखक कहा जाता है । इसी परंपरा अनुरूप आज भी कायस्थ समाज अपनी बुद्धिमत्ता के लिए जाना जाता है । वह कलम दवात की ही साधना करता है। प्रतिवर्ष वैशाख शुक्ल सप्तमी को भगवान की प्रकट तिथि मानी जाती है और इसीलिए समाज उनका प्रकट उत्सव मनाती है ।
उक्त कार्यक्रम में आसपास क्षेत्रों के सैकड़ों समाजजन सम्मिलित हुए।
अंत में समाज अध्यक्ष लोकेंद्र श्रीवास्तव द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

