नरवाई जलाने से बचें, किसानों को जागरूक करने गांव-गांव पहुंचा कृषि अमला
गुना
जिले में रबी वर्ष 2025-26 की फसलों की कटाई कार्य जारी है तथा अधिकांश फसलों की कटाई हेतु कम्बाईन हार्वेस्टर प्रचलन में है। प्राय: ऐसा निरंतर पाया जा रहा है कि कम्बाईन हार्वेस्टर से कटाई उपरांत नरवाई में आग लगाई जाती है। जिसके कारण वायु प्रदुषण, मृदा स्वास्थ्य क्षति, आगजनी की घटनाऐं एवं आमजन के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार एवं उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विभाग श्री संजीव शर्मा द्वारा अपने अधिनस्थ अमले के साथ विकासखण्ड बमौरी के ग्राम-सोनखरा, गडलाउजारी, पाटन, विशनवाड़ा, मानपुर आदि ग्रामों में किसानो को जागरूक करने हेतु रात्रिकालीन कृषक संगोष्टि/चौपाल का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को गेंहू की नरवाई/फसल अवशेष न जलाने की सलाह दी गई। साथ ही किसानों को नरवाई/ फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर खाद बनाने हेतु प्रेरित किया। जिसके उपयोग से मिट्टी में कार्बनिक पदार्थो की मात्रा में वृद्धि होती हैं। जिससे मिट्टी की भौतिक एवं रासायनिक संरचना में सुधार होता हैं तथा उपज में वृद्धि होती हैं, रासायनिक उर्वरकों पर किसानो की निर्भरता कम होती हैं।
साथ ही उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग श्री शर्मा द्वारा अपने मैदानी अमले को लगातार निर्देशित किया जा रहा है कि नरवाई जलने की घटनाओं को रोकने के लिए समस्त मैदानी अमले द्वारा अपने क्षेत्र में भ्रमण कर कृषक चौपालों का आयोजन निरंतर किया जा रहा हैं एवं किसानों को नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के संबंध, इसके उपयोग के विषय में विस्तृत जानकारी देकर जागरूक किया जा रहा हैं।
उप संचालक कृषि द्वारा कृषकों से लगातार अपील की जा रही है कि ट्रेक्टर चलित स्प्रेयर पंप एवं ट्रेक्टर चलित वाटर टेंकर (पंप सहित) में पानी भरकर तैयार रखें ताकि खेत में आग लगने की घटनाओं पर काबू पाया जा सके एवं किसी कारणवश नरवाई/ फसल अवशेष में आग लगने की स्थिति में खेत के चारों और जुताई करें जिससे पास के अन्य खेतों मे आग न फैल सके। नरवाई प्रबंधन हेतु उपयोग किये जाने वाले आधुनिक कृषि यंत्रों (रोटावेटर, मल्चर, प्लाऊ इत्यादि) का उपयोग कर नरवाई/फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाये एवं ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई सुपर सीडर/हैप्पी सीडर से करें।
