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परिषद् की बैठक हुई संपन्न

परिषद् की बैठक हुई संपन्न। 



गुना।


चेतना साहित्य एवं कला परिषद गुना की कार्यकारिणी की बैठक वरिष्ठ कवि विष्णु साथी के स्वनिवास पर संपन्न हुई। जिसमें नवीन कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण तथा भविष्य की रुपरेखा तैयार की गई। गुना नगर में चेतना साहित्य एवं कला परिषद ही एक मात्र ऐसी संस्था है जो साहित्य एवं सम्मान तथा प्रकाशन के क्षेत्र में विगत पचपन वर्षों से कार्यरत हैं। इस संस्था द्वारा कवि एवं साहित्यकार, शिक्षकों, तथा मातृशक्ति का सम्मान किया गया। दो आंचलिक सम्मेलन आयोजित कर अभिव्यक्ति एवं सृजन पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि शपथ ग्रहण प्रथम सत्र में और कवि गोष्ठी द्वितीय सत्र में दिनांक 14/6/26 रविवार को शाम सात बजे रखा गया है। स्थान एवं मुख्य अतिथि से संपर्कोपरांत अगली सूचना शीघ्र दी जाएगी। सभी कार्यकारिणी के सदस्यों ने कार्यक्रम को तन,मन, धन से सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया है। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने की। बैठक में प्रेम सिंह प्रेम अध्यक्ष, रामवीर शर्मा वरिष्ठ उपाध्यक्ष, श्रीमती कीर्ति मोरोलिया सचिव, सुश्री फरीदा बानो गुनाबी सहसचिव, श्रीमती रेखा खरे कोषाध्यक्ष, धर्मवीर सिंह संगठन सचिव, शिवम् श्रीवास्तव सहसंगठन सचिव, उमाशंकर भार्गव प्रचार सचिव, अभिनय मोरे सहप्रचार सचिव, हरीश सोनी अंकेक्षक, संजय खरे कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे। इसके बाद कवि गोष्ठी संपन्न हुई। बैठक के द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी संपन्न हुई। जिसका संचालन प्रेम सिंह प्रेम ने करते हुए कहा फकीर भी दिल खोलकर हंस लेते हैं, खुशियां पैसों की मोहताज नहीं होती। वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने मुसीबतों का सामना करने पर जोर देते हुए कहा कि हर मुसीबत का करो दिल खोलकर के सामना,अय नौजवानों ज़िन्दगी में बुजदिली अच्छी नहीं। गीतकार हरीश सोनी ने कहा कि हो पेट भरा तो लगती है ये हुस्न की रंगत चंदा सी,जब भूख में जलती हों आंतें चंदा भी निवाला लगता है। श्रीमती कीर्ति मोरोलिया ने पानी के ऊपर यूं भाव व्यक्त किए पानी बचाना है जीवन बचाना है, पानी है तो कल है हमारा,हर मुश्किल का हल है हमारा। श्रीमती रेखा खरे ने कहा या रब मुझे ख्वाब कुछ ऐसा दिखाई दे,सारी रात ख्वाब में मुझे बस वो दिखाई दे। तुझको जब मेरे प्यार पर यकीं ही नहीं,तू ही बता यार कोई कब तक सफाई दे।उमाशंकर भार्गव ने कहा उनसे न संबंध बनाये कभी जो वतन से करते गद्दारी है, घर वह घूरा लगता है जिसमें नहीं रहती कोई नारी है। सुश्री फरीदा बानो गुनाबी ने शेर पढ़ते हुए कहा सुनो एक तुम्हारी कुर्बत है कि मेरी रुह को अब सकून देती है। मुझको बड़ा वह अजीब सी नजदीकी का अहसास देती है।संजय खरे सहज ने शेर पढ़ते हुए कहा कि पहले था जितना अब वो उतना खास नहीं है, उससे बिछडके अब दर्द का  एहसास नहीं है।थीजब प्यास तो न था हमें कतरा भी नसीब, है जब सामने दरिया तो हमको प्यास नहीं है। रामवीर शर्मा ने कहा कि दिन में सूरज आग उगलता,रात में तपती धरनी।घर में रह आराम से देखो,नोतपा की करनी।धर्मवीर सिंह ने कहा देखी फूलों की सुंदरता, महका महका प्यार कहां,सूख गए नदियां वो झरने पहले जैसी धार कहां। इस अवसर पर अभिनय मोरे, शिवम् श्रीवास्तव, राम जीवन भार्गव, प्रमोद भार्गव हमीरपुर आदि उपस्थित रहे।

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