राष्ट्रीय आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम में सड़क सुरक्षा एवं यातायात जागरूकता व्याख्यान
Guna- पुलिस अधीक्षक हितिका वासल के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत सुमन के मार्गदर्शन तथा डीएसपी यातायात मुकेश कुमार दीक्षित के पर्यवेक्षण में थाना प्रभारी यातायात निरीक्षक अजय प्रताप सिंह द्वारा आज जिला मुख्यालय स्थित पी.जी. कॉलेज में राष्ट्रीय आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम में उपस्थित लगभग 175 प्रशिक्षु प्रतिभागियों एवं स्टाफ सहित कुल लगभग 200 लोगों को सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों के संबंध में जागरूक किया गया।
अपने संबोधन में थाना प्रभारी यातायात ने कहा कि आप सभी देश और समाज का भविष्य हैं। आज आप आपदा मित्र के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, कल आप किसी जरूरतमंद की सहायता कर उसके जीवन की रक्षा कर सकते हैं। इसलिए सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक होना और दूसरों को जागरूक करना आपकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि भारत में प्रतिवर्ष लगभग 4.5 लाख से अधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें लाखों लोग घायल होते हैं तथा लगभग 1.7 लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि किसी परिवार के सपनों, खुशियों और भविष्य के समाप्त हो जाने की दर्दनाक कहानी हैं। सड़क दुर्घटना में कभी किसी का पिता, कभी माता, कभी भाई-बहन, तो कभी बेटा-बेटी हमेशा के लिए बिछड़ जाते हैं। थोड़ी सी सावधानी और यातायात नियमों का पालन करके इन दुर्घटनाओं तथा उनसे होने वाली मृत्यु को काफी हद तक रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हेलमेट दोपहिया वाहन चालकों के लिए सुरक्षा कवच है। अधिकांश गंभीर सिर की चोटें और मौतें बिना हेलमेट वाहन चलाने के कारण होती हैं। इसलिए दोपहिया वाहन चलाते समय चालक एवं पीछे बैठने वाले दोनों व्यक्तियों को मानक हेलमेट अवश्य पहनना चाहिए तथा उसकी स्ट्रैप भी बांधनी चाहिए। साथ ही दोपहिया वाहन पर तीन सवारी कभी नहीं बैठानी चाहिए।
चारपहिया वाहन चालकों एवं यात्रियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीट बेल्ट जीवन रक्षक उपकरण है। वाहन में बैठे प्रत्येक व्यक्ति को सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य है। सड़क दुर्घटना के समय एयरबैग भी तभी प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं जब सीट बेल्ट लगी हो।
उन्होंने उपस्थित प्रतिभागियों को नशामुक्त जीवन का संदेश देते हुए कहा कि शराब, तंबाकू, गुटखा अथवा किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करना चाहिए तथा नशे की हालत में कभी वाहन नहीं चलाना चाहिए। नशे में वाहन चलाना ऐसा है जैसे किसी मानसिक रूप से असंतुलित व्यक्ति के हाथ में भरी हुई बंदूक दे देना।
उन्होंने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग न करने, यातायात संकेतों एवं ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करने, निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने तथा पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों को प्राथमिकता देने की भी अपील की। साथ ही वैध ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने एवं सदैव साथ रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
अंत में उन्होंने कहा कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर की गई सहायता किसी को नया जीवन दे सकती है। इसलिए सड़क दुर्घटना पीड़ितों की यथासंभव मदद करें तथा स्वयं भी यातायात नियमों का पालन कर दूसरों को प्रेरित करें। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने एवं समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

