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वर्तमान में बेटा अपने पिताजी को अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने का अधिकार भी भूल गया।

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला 

वर्तमान में बेटा अपने पिताजी को अंतिम संस्कार में मुखाग्नि देने का अधिकार भी भूल गया। 


राघौगढ़ 22 अगस्त। विद्या समय रत्न महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने राघौगढ़ नगर में विद्यासागर सभागार में मंगल प्रवचन करते हुए कहा संस्कारों के अभाव में युवा पीढ़ी अपने वृद्ध माता-पिता की सेवा न कर महानगरों एवं विदेशों में नौकरी कर धन कमाने में लग रहे हैं। 

                           मुनिराज ने कहा मां बाप अपने बेटों को अच्छी से अच्छी शिक्षा देकर उन्हें इस योग्य बना रहे हैं कि भी पैसा कमाने के चक्कर में भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को भूल कर अपने मां-बाप को ही भूल रहे हैं। बेटे बेटी को बचपन में अच्छे भारतीय संस्कार न देकर मां-बाप उनको कान्वेंट स्कूल की शिक्षा दिला रहे हैं। इस स्थिति में बेटे बेटी भारतीय संस्कारों को भूल रहे हैं और मां-बाप को अकेले अपने हाल पर छोड़कर नौकरी कर रहे हैं। जब वे महानगरों में अच्छे वेतन पर नौकरी करने लगते हैं तो वहीं प्रेम प्रसंग में शादी कर लेते हैं। माता-पिता जिन्होंने अपने लाडले बेटी बेटे का अच्छे से अच्छा पालन पोषण किया।पढ़ा लिखा कर इतना योग्य बनाया की वह महानगर या विदेश में नौकरी कर रहा है। जब उन्हें यह समाचार अपने प्यारे बेटे से मिलता है कि उसने मनपसंद शादी कर ली है। उस समय माता-पिता दुखी होने के अलावा और क्या कर सकते हैं। मुनिराज ने कहा पहले शुभ विवाह के बाद पति-पत्नी में प्रेम होता था। अब प्रेम विवाह के बाद पति-पत्नी में प्रेम होता है और वह प्रेम अधिक समय तक स्थायी न रहकर वैवाहिक संबंध विच्छेद में परिणित हो जाता है। 

आपने धर्म सभा में यह आवाहन किया कि अपने सगे सुपुत्र की अपेक्षा नगर के ही ऐसे होनहार बालक बालिकाओं को जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है और वह बुद्धिमान है उन्हें पढ़ाई के लिए मदद करें। जिन जरूरतमंद छात्र-छात्राओं की आपने मदद की है  बे आपका अंतिम समय में अपने सगे बेटे बेटी से ज्यादा आपका ध्यान रखेंगे। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने युवा पीढ़ी को आव्हान किया कि आप भारतीय संस्कारों का पालन करते हुए अपने माता- पिता के अंतिम संस्कार में उन्हें मुखाग्नि देने का अधिकार तो सुरक्षित रखें। वर्तमान में स्थिति यह हो गई है कि मां-बाप के अंतिम संस्कार के लिए सगे बेटे के पास समय नहीं है। अपने मां-बाप के अंतिम संस्कार को महानगरों में ही रहकर या विदेश में रहकर मोबाइल पर वीडियो कॉलिंग से देखकर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं यह स्थिति शर्मनाक है।

                        उल्लेखनीय है धर्म नगरी राघौगढ़ में आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज का पावन चातुर्मास नवाचार्य समय सागर जी महाराज के आदेश से चल रहा है। चातुर्मास में राघौगढ़ नगर में धर्म की गंगा बह रही है। प्रतिदिन प्रात 6:45 बजे से मुनि श्रमण सागर जी महाराज युवक युवतियों की मोटिवेशन क्लास में उन्हें जीवन में उन्नति कैसे करें कभी निराश न हो आदि मार्गदर्शन दे रहे हैं।

दोपहर में 3 बजे से महिलाओं की क्लास मुनि श्रमण सागर जी के सानिध्य में एवं 4 बजे से मुनि ओंकार सागर जी के सानिध्य में क्लास चल रही है।

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