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स्कूल तो गधे बदलते हैं, बुद्धिमान कक्षा बदलते हैं।

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला 

स्कूल तो गधे बदलते हैं, बुद्धिमान कक्षा बदलते हैं। 

राघौगढ़ में 25 अगस्त से रक्षाबंधन महामंडल विधान का आयोजन।

 


राघौगढ़ 21 अगस्त। विद्या समय रत्न महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता ,बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा आपको स्वयं को बदलना आवश्यक है। आप आप स्वयं को न बदलकर दूसरे को बदलने का प्रयास करते हैं। दूसरे को बदलने का प्रयास चिकने घड़े पर पानी डालने के समान है। मुनिराज ने कहा दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं एक वे जो दूसरे के अवगुणों को देखते हैं। दूसरे वह होते हैं जो दूसरे के गुणों को देखते हैं। एक व्यक्ति में अनेक बुराइयां होने के बावजूद उसमें एक सदगुण आवश्यक होता है। हमें उसके गुण को ही देखना चाहिए। प्रवचन में महाभारत कालीन उदाहरण देते हुए मुनिराज ने कहा गुरु द्रोणाचार्य ने अपने शिष्य दुर्योधन एवं युधिष्ठिर को कहा कि आप एक थाली में भोजन लेकर जाओ और नगर में जो भी गुणीजन मिले उसको यह भोजन कराकर आओ। पहले थाली लेकर दुर्योधन गए पूरे नगर में घूम कर आ गए और गुरु जी से कहा कि मुझे नगर में कोई भी गुणीजन नहीं मिला। इसके बाद गुरु आज्ञा से युधिष्ठिर उस थाली को लेकर आश्रम से बाहर निकले। आश्रम के द्वार पर कुत्ता बैठा था उन्होंने आदर से भूखे कुत्ते को भोजन खिलाया और वापस गुरु जी के पास आए। गुरुजी बोले इतनी जल्दी भोजन करा कर आ गए, किसको भोजन कराया तो युधिष्ठिर ने कहा गुरुजी आश्रम के बाहर एक कुत्ता भूखा बैठा था मैंने उसे भोजन कराया। कुत्ते को भोजन इसलिए कराया कि कुत्ता का सबसे अच्छा गुण यह है कि वह अपने स्वामी का वफादार होता है। गुरु जी कहा दुर्योधन तुमने हर व्यक्ति में अवगुण देखें और युधिष्ठिर ने गुण देखें।आपने कहा स्कूल तो गधे बदलते हैं गधे का अर्थ यह है कि जो पढ़ने में कमजोर होते हैं वह स्कूल बदलते हैं और कक्षा वह बदलते हैं जो बुद्धिमान होते हैं और एक कक्षा में उत्तीर्ण होकर दूसरी कक्षा में प्रवेश लेते हैं। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा रावण में हजार बुराइयां थी, मगर वह ज्ञानी था जब रावण मारणासन्न स्थिति में पड़ा हुआ था जब मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने लक्ष्मण जी को आदेश देकर रावण से ज्ञान की बातें सीखने का आदेश दिया था। अंत में कहा दूसरे मत देखो, स्वयं को देखो। स्वयं में सुधार करने की

आवश्यकता है।

                     चातुर्मास व्यवस्था कार्यक्रम संयोजक विकास कुमार जैन ने जानकारी दी है कि रक्षाबंधन पावन पर्व के अवसर पर मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में आगामी 25 अगस्त से 28 अगस्त तक आचार्य विद्यासागर भवन राघौगढ़ में श्री रक्षाबंधन महामंडल विधान का आयोजन किया जा रहा है। विधान का आयोजन बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य तरुण भैया इंदौर के मार्गदर्शन में होगा। विधान के पुण्यार्जक परिवार राजेंद्र कुमार सिद्धार्थ कुमार श्रेयांश कुमार जैन मेडिकल परिवार राघौगढ़ है। FTD

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