पेशा नहीं बल्कि सेवा है चिकित्सा - डॉ. शुभम भेंडारकर
मिसाल बना अनोखा समाजसेवा अभियान
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - "नर सेवा ही नारायण सेवा है" — इस उक्ति को छत्तीसगढ़ की धरा पर पूरी आत्मीयता से जीवंत कर रहे हैं युवा चिकित्सक डॉ. शुभम भेंडारकर। जहाँ आज के दौर में चिकित्सा क्षेत्र व्यावसायिकता की होड़ में घिरता नजर आता है और महँगे इलाज के कारण आम आदमी आर्थिक तंगी के जाल में फँस जाता है , वहीं डॉ. शुभम भेंडारकर बीते तीन वर्षों से समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिये उम्मीद की एक नई किरण बने हुये हैं। बिना किसी शोर-शराबे और बिना एक पैसा फीस लिये वे छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में लगातार मुफ़्त स्वास्थ्य सेवायें प्रदान कर रहे हैं। उनका यह अनूठा समाजसेवा अभियान अब एक मिसाल बन चुका है।
साधारण परिवार से असाधारण सफलता का सफर
डॉ. शुभम का यह सफर बेहद संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायक रहा है। उनके पिता एक मेहनती किसान हैं , जिन्होंने दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर अपने बेटे के सपनों को सींचा। वहीं उनकी माता जी एक कुशल गृहणी हैं। अपनी इस सफलता और सेवा भावना का श्रेय डॉ. शुभम अपनी माताजी को देते हैं। उनका मानना है कि दूसरों के प्रति दया , करुणा और निस्वार्थ मदद करने की सीख उन्हें बचपन से ही अपनी माताजी से मिली है। माताजी के इन्हीं संस्कारों और प्रेरणा की बदौलत आज वे एक चिकित्सक के रूप में केवल बीमारियों का इलाज नहीं कर रहे , बल्कि लोगों के जीवन में नई आशा का संचार भी कर रहे हैं।
अभियान की शुरुआत : कैसे बनी सेवा ही प्राथमिकता ?
डॉ. शुभम भेंडारकर ने अपने चिकित्सीय करियर की शुरुआत में ही यह महसूस कर लिया था कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं का भारी अभाव है। गाँव के लोग छोटी से छोटी बीमारी के इलाज के लिये या तो झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर काटते हैं या फिर बड़े शहरों के निजी अस्पतालों का भारी भरकम खर्च ना उठा पाने के कारण अपनी बीमारी को सहने पर मजबूर हो जाते हैं। इसी पीड़ा को देखकर उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी डॉक्टरी की डिग्री का उपयोग किसी व्यावसायिक लाभ के लिये नहीं , बल्कि उन लोगों के जीवन को बचाने और सँवारने में करेंगे जो सचमुच निराश्रित और गरीब हैं। पिछले तीन वर्षों से उनका यह निःशुल्क सेवा अभियान बिना रुके लगातार जारी है , डॉ. शुभम केवल एक जगह बैठकर मरीजों का इंतजार नहीं करते , बल्कि वे खुद छत्तीसगढ़ के सुदूर और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में पहुँचकर मुफ्त चिकित्सा शिविर लगाते हैं। जिसमें ग्रामीणों की बीमारियों की सटीक पहचान कर उन्हें उचित और योग्य चिकित्सीय परामर्श दिया जाता है। कई बार मरीज परामर्श मिलने के बाद भी पैसे ना होने के कारण दवाईयाँ नहीं खरीद पाते। ऐसे लोगों को डॉ. भेंडारकर अपनी ओर से यथासंभव मुफ़्त आवश्यक दवाइयाँ उपलब्ध कराते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में फैले अंधविश्वास और अज्ञानता को दूर करने के लिये वे नियमित रूप से स्वच्छता , संतुलित आहार और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूकता सत्र भी चलाते हैं। इसके अलावा उनके द्वारा कुपोषण से पीड़ित बच्चों और मोतियाबिंद , जोड़ों के दर्द से जूझ रहे बुजुर्गों के लिये विशेष स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किये जाते हैं।
ग्रामीणों के लिये बने 'धरती के भगवान'
इलाज कराने आये बुजुर्गों और ग्रामीणों का कहना है कि आज के जमाने में जब डॉक्टर से बात करने मात्र के लिये सैकड़ों-हजारों रुपये परामर्श शुल्क देना पड़ता है , ऐसे समय में डॉ. शुभम भेंडारकर का उनके गाँव आकर आत्मीयता से इलाज करना किसी चमत्कार से कम नहीं है। कई गरीब परिवारों का कहना है कि डॉ. शुभम उनके परिवार के सदस्य की तरह उनकी देखभाल करते हैं और सही मार्गदर्शन देकर बड़े वित्तीय संकट से बचा लेते है ।
युवा डॉक्टरों और समाज के लिये प्रेरणा -
डॉ. शुभम भेंडारकर का स्पष्ट मानना है कि चिकित्सा की डिग्री केवल आजीविका कमाने का जरिया नहीं है , बल्कि यह ईश्वर द्वारा दिया गया एक ऐसा माध्यम है जिससे किसी का रोता हुआ चेहरा हँसाया जा सकता है। अगर समाज का हर समर्थ व्यक्ति अपने कौशल का थोड़ा सा हिस्सा भी निस्वार्थ रूप से समाज को दे , तो कोई भी व्यक्ति लाचार नहीं रहेगा। उनका यह तीन साल का सेवा सफर आज छत्तीसगढ़ के तमाम युवा डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों को भी अपनी जड़ों से जुड़ने और समाजसेवा की ओर कदम बढ़ाने के लिये प्रेरित कर रहा है।
बदल रही है छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य की तस्वीर -
डॉ. शुभम भेंडारकर का यह निस्वार्थ अभियान यह साबित करता है कि जब इरादों में सच्चाई और दिल में दया की भावना हो , तो संसाधन कभी बाधा नहीं बनते। बीते तीन वर्षों में हजारों मरीजों का सफल इलाज कर चुके डॉ. भेंडारकर आज छत्तीसगढ़ में मानवता , संवेदनशीलता और निस्वार्थ सेवा के सबसे बड़े प्रतीक बनकर उभर रहे हैं। पूरे प्रदेश में उनके इस अनोखे समाजसेवा अभियान की जमकर सराहना की जा रही है।
आयुर्वेद के जरिये कर रहे हैं आरोग्य की रक्षा -
दिल्ली यूनिवर्सिटी से मिली विश्वस्तरीय शिक्षा और अपनी जड़ों से मिले संस्कारों के मेल से डॉ. शुभम भेंडारकर हर वर्ग के मरीजों की सेवा में तत्पर हैं। एक किसान का बेटा होने के कारण वे ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं , इसलिये उनका मुख्य उद्देश्य हर व्यक्ति तक सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें पहुंचाना है। डॉ. शुभम भेंडारकर की यह सफलता और सेवा भावना आज के युवाओं के लिये एक मिशाल है , जो यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों और परिवार के संस्कार साथ हों , तो किसी भी मुकाम को हासिल कर समाज के लिये प्रेरणा बना जा सकता है।
