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अस्मिता नेशनल कयाकिंग और कैनोइंग प्रतियोगिता भोपाल में छग ने जीते छह पदक

 अस्मिता नेशनल कयाकिंग और कैनोइंग प्रतियोगिता भोपाल में छग ने जीते छह पदक



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट


भोपाल - अस्मिता नेशनल कयाकिंग और कैनोइंग प्रतियोगिता का आयोजन लोअर लेक भोपाल में 08 से 10 अगस्त तक आयोजित किया गया। इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ को कुल 06 पदक हासिल हुये। भोपाल में आयोजित अस्मिता नेशनल में कयाक एकल नाव 200 मीटर में ब्रांज मेडल हासिल करने वाली स्वाति साहू ने मेडल हासिल कर लौटने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुये अरविन्द तिवारी को बताया कि वे ग्राम मोपर (बलौदाबाजार) की रहने वाली हैं। इनके पिता का  नाम डॉक्टर दौलत राम साहू और माता का नाम श्रीमती ललिता साहू है। इनसे छोटे एक भाई और एक बहन है। ये मामा के यहां रायपुर में रहकर पढ़ाई पूरी की है और वहीं से इन्होंने अपना गेम शुरू किया है। जब ये बारह साल की थी , तब से गेम में हैं। उन्होंने बताया कि ये काफी सारे मेडल ले रखी हैं , सिर्फ जूनियर पास सब जूनियर सीनियर में गोल्ड सिल्वर ब्राउन टीनॉन है।‌ वे अभी भी गेम तैयार कर रही हैं और उसमें पिछले साल इनका दो गोल्ड नेशनल में आया। ये वर्ष 2018 में  इंटरनेशनल खेलने के लिये हंगरी गई थीं और वर्ष 2026 में छग सरकार द्वारा इन्हें उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषत किया गया है। इन्होंने यहां तक पहुंचने में काफी संघर्ष किया है , इनके पापा बचपन से ही इन्हें सपोर्ट करते आ रहे हैं। वे रोज इनको मोटिवेट कर प्रैक्टिस के लिये जोर देते थे। इसके मम्मी पापा ने आर्थिक रूप से भी इन्हें बहुत सपोर्ट किया है , आज ये जो कुछ भी हैं उन्हीं की वजह से हैं। ये वर्तमान में उत्तराखंड में आईटीबीपी पुलिस बल में कार्यरत हैं। वहीं दोनंदे कला रायपुर निवासी कौशल नंदिनी ने बताया कि वे कयाकिंग कैनोइंग वर्ष 2010 से स्टार्ट की है , अभी अस्मिता नेशनल में इन्हें कयाक एकल नाव 1000 मीटर और कयाक एकल नाव 500 मीटर में दो रजत पदक मिला है। इनके पिता का नाम अरविन्द सिंह ठाकुर और माता का नाम प्रतिमा ठाकुर है। ये वर्ष 2010 से लेकर अभी तक लगातार मेडल लेते आई हैं।  नेशनल गेम्स में इनका सिल्वर मेडल है और इसके अलावा ये इंटरनेशनल थाईलैंड बैंकॉक पटाया , हंगरी बुडापेस्ट भी जा चुकी हैं। घरवालों से इन्हें पूरा सपोर्ट मिलता है। खेलकूद के लिये इनको मेरे चाचा और बड़ी बहन से प्रेरणा मिली। वर्ष 2013 में इनके कोच नवीन साहू के विदेश चले जाने के बाद इन्होंने अपने सीनियर प्लेयर से ट्रेनिंग ली। ये भी उत्तराखंड में आईटीबीपी पुलिस में कार्यरत हैं। इसी कड़ी में प्रतियोगिता समाप्ति पश्चात टेमरी माना कैम्प रायपुर निवासी कोच पिंकी साहू ने बताया कि वे उत्कृष्ट खिलाड़ी के साथ - साथ नेशनल मेडलिस्ट , यूनिवर्सिटी मेडलिस्ट , शहीद पंकज विक्रम और राजीव पांडेय अवॉर्ड से भी सम्मानित हैं। इसके अलावा इनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुये इन्हें एनआईएस प्रमाण पत्र भी हासिल हुआ है। ये वर्ष 2011 से खेल से जुड़ी हुई हैं और अभी तक अनेकों अवॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं। वर्तमान में ये कयाकिंग और कैनोइंग दंतेवाड़ा में कोच के रूप में अपनी सेवायें दे रही हैं। खासकर अपने पापा के सपोर्ट से ये गांव से निकलकर संघर्ष करते हुये आज इस मुकाम पर पहुंची हैं। प्रदेश के खिलाड़ी बेटियों खासकर दिव्यांगों को ओलंपिक तक पहुंचाना इनका मुख्य उद्देश्य है। अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाते हुये प्रदेश और देश का नाम रोशन करना चाहती हैं। अंत में विजेता खिलाड़ियों को संघ के अध्यक्ष बलदेव सिंह भाटिया , सचिव अभिजीत मिश्रा , संयुक्त सचिव प्रशांत सिंह रघुवंशी , कोच पिंकी साहू , अशोक साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने बधाई देते हुये उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है।

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