राघौगढ़ में चातुर्मास मंगल कलश की स्थापना का कार्यक्रम आयोजित हुआ।
प्रतिष्ठाचार्य तरुण भैया ने कहा मुनिराज का चातुर्मास राघौगढ़ का सौभाग्य।
राघौगढ़ 9 अगस्त। आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य महान तपस्वी औजस्वी वक्ता बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के पावन चातुर्मास कलश स्थापना का मांगलिक कार्यक्रम राघौगढ़ में आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज की संगीत में सामूहिक पूजन के साथ प्रारंभ हुआ।
दोनों मुनिराज के मंगल प्रवचन हुए।
प्रथम कलश अशोक कुमार अतुल कुमार भरसूला परिवार, द्वितीय कलश डॉ अजित रावत,अनिल
कुमार रावत परिवार, तृतीय कलश सिंघी अशोक कुमार राजेश कुमार भारिल्य परिवार चौथा कलश रमेश चंद्र प्रदीप कुमार डॉ सन्तोष माल्या परिवार,
पांचवां प्रमोद कुमार प्रियंक कुमार चौधरी, छटवां
अखिलेश कुमार जैन कालोनाइजर गुना सातवां
कलश प्रतिष्ठाचार्य तरुण भैया ने कहा राघौगढ़ वासियों का सौभाग्य है की दो मुनिराज का चातुर्मास राघौगढ़ में होने जा रहा है। विद्या सागर दिगंबर जैन पाठशाला के नन्हे मुन्ने बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। राघौगढ़ की बहू सुप्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना श्री मती प्रेरणा जैन ने नृत्य प्रस्तुत किया। सुसनेर की ओंकार बालिका मंडल ने नृत्य नाटिका प्रस्तुत किया। मुनि श्रमण सागर जी महाराज द्वारा लिखित 114 कविताओं के काव्य संग्रह की पुस्तिका श्रमण धारा का कार्यक्रम में विमोचन हुआ। काव्य संग्रह पुस्तिका की जानकारी कार्यक्रम में भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक विजय कुमार जैन ने दी। कार्यक्रम में मुनिराज के गृहस्थ जीवन के परिजनों का सम्मान जैन समाज राघौगढ़ द्वारा किया।अतिथियों का स्वागत जैन समाज के अध्यक्ष अशोक कुमार भारिल्य
ने किया। कार्यक्रम में सागर, महाराजपुर, दिल्ली,गंजबासौदा, गोटेगांव, सुसनेर, गुना शाढ़ौरा,नलखेड़ा, बीनागंज कुंभराज, जामनेर, रुठियाई, धरनावदा, एनएफएल विजयपुर, साडा कॉलोनी एवं आदि से श्रद्धालु जनों ने पधारकर भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज करायी।
