कृषकों के लिए कृषि परामर्श
सोयाबीन फसल में कीट एवं रोग नियंत्रण के उपाय
गुना
पीला मोज़ेक/सोयाबीन मोज़ेक रोग के लक्षण दिखने पर प्रारंभिक अवस्था में ही रोगग्रस्त पौधों को खेत से उखाड़कर निष्कासित करें तथा इन रोगों को फैलाने वाले वाहक सफ़ेद मक्खी/एफिड की रोकथाम हेतु थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125मिली/हे) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हे) या एसिटेमीप्रीन 25%+बायफेंथ्रिन 25%WG (250ग्रा./हे) का छिड़काव करें। इनके छिड़काव से तना मक्खी का भी नियंत्रण किया जा सकता है। यह भी सलाह है कि सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण हेतु कृषकगण अपने खेत में विभिन्न स्थानों पर पीला स्टिकी ट्रैप लगाएं।
बिहार हेयरी कैटरपिलर एवं टस्क मोथ का प्रकोप होने पर झुण्ड में रहने वाली इन इल्लियों को प्रारंभिक अवस्था में ही पौधे सहित खेत से निष्कासित करें एवं फसल पर फ्लूबेंडियामाइड 20WG (250-300 ग्रा/हे) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 SC (150 मिली/हे) या लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 04.90 % CS (300 मिली/हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.80 % EC (333 मिली/हे.) छिड़काव करें।
सोयाबीन फसल में तना मक्खी एवं सफ़ेद मक्खी के नियंत्रण हेतु लक्षण दिखाई देने पर बाजार में उपलब्ध पूर्वमिश्रित कीटनाशक थायोमेथोक्सम 12.60%+लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. @125 मिली./हे. या पूर्वमिश्रित कीटनाशक बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या आइसोसायक्लोसरम 9.2 WW.DC (10% W/V) DC (600 मिली/हे.) का छिड़काव करें।
सेमीलूपर इल्ली के नियंत्रण हेतु निम्न में से किसी भी एक रसायन का छिड़काव करें: क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी, ( 150म.ली./हे) या इमामेक्टिन बेंजोएट 01.90 (425 मि.ली./हे), या फ्लूबेंडियामाइड 20ड्लयू.जी (250-300 ग्राम/हे) या फ्लूबेंडियामाइड 39.35 एस.सी ( 150म.ली.) या इंडोक्साकार्ब 15.8एस .सी (333 मि.ली/हे), या लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 04.90 सी. एस. (300 मिली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50ई.सी.(1 ली/हे) या नोवाल्युरोन + इन्डोक्साकार्ब 04.50 % एस. सी. (825-875 मिली/हे) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 09.30 % +लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 04.60 % ZC, (200 मिली/हे) या ब्रोफ्लानिलाइड 300 g/l एस.सी. (42-62 ग्राम/हे), का छिड़काव करें।
कीटनाशक: क्लोरइंट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. (150 मिली/हे) या इन्डोक्साकार्ब 15.8 एस.सी (333 मि.ली./हे)
रायजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग के लक्षण दिखाई देने पर सलाह हैं कि नियंत्रण हेतु अनुशंसित फफूंदनाशक फ्लुक्सापाय्रोक्साड + पायरोक्लोस्ट्रोबीन (300 मिली/हे) या पायरोक्लोस्ट्रोबीन इपोक्कोसीकोनाझोल + (750 मिली/हे) का अपने फसल पर छिड़काव करें।
सोयाबीन फसल में कॉलर रॉट (गर्दनी सड़न) नामक रोग का संक्रमण देखा जा रहा हैं। सलाह हैं कि इनके नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम 50% (500 ग्राम/हेक्टेयर) का फसल पर छिड़काव करें।
एन्थ्राक्नोज रोग के प्रारंभिक लक्षण देखे जाने पर प्रारंभिक अवस्था में ही इसके नियंत्रण हेतु टेबूकोनाझोल 25.9 ई.सी. (625 मिली/हे) या टेबूकोनाझोल 38.39 एस.सी. (625 मिली/हे) या टेबूकोनाझोल 10%+सल्फर 65%WG (1.25 किग्रा./हे) या कार्बेन्डाजिम 12%+मेन्कोजेब 63% ड्लयू.पी. (1.25 किग्रा/हे) से फसल पर छिड़काव करें।
सूखा प्रबंधन के उपाय
सूखे की स्थिति / अधिक दिनों तक बारिश की अनुपस्थिति में कृषकों को निम्न उपाय अपनाने की सलाह हैं:
भूमी में दरारें पड़ने से पूर्व ही अनुसार स्प्रिंकलर, टपक सिंचाई या परंपरागत विधियों से सिंचाई करें।
20–25 दिन की फसल में थायोयूरिया (Thiourea) का 750 पीपीएम (750 मिग्रा/लीटर पानी ) घोल बनाकर पणीय छिड़काव करें।.
सूखे के दौरान लोह तत्व की अनुपलब्धता से सोयाबीन की ऊपरी पत्तियाँ पीली हो सकती हैं, जो वर्षा आने पर पूर्ववत हो सकेगा। अधिक तीव्रता होने पर 1% फेरस सल्फेट+0.2% चूना (प्रति लीटर पानी में 10 ग्राम फेरस सल्फेट + 2 ग्रा. चूना) मिलाकर फसल पर छिड़काव करें।
अतिवर्षा की स्थिति में जलभराव से होने वाले नुकसान से फसल को बचाने हेतु जल-निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
मूंग एवं उड़द में रोग एवं कीट नियंत्रण के उपाय
सफेद मक्खी (White Fly) रोकथाम :- थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125मिली/हे) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हे) या एसिटेमीप्रीन 25%+बायफेंथ्रिन 25%WG (250ग्रा./हे) का छिड़काव करें।
माहू सा चेपा रोकथाम :- इमिडाथ्लोप्रिड 17.8% SL, 200 से 250 ml 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
हैरी केटरपिलर, फली छेदक रोकथाम :- प्रोफेनोफोस 40% + साइपरमेथ्रिन 4% EC की 1 लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
पीला मोजेक रोग :- थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125मिली/हे) या बीटासायफ्लुथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली/हे) या एसिटेमीप्रीन 25%+बायफेंथ्रिन 25%WG (250ग्रा./हे) का छिड़काव करें।
पाउडरी मिल्डयू रोग :- Sulphur 80% WP @ 2 से 2.5 gm/ltr घोल बनाकर छिड़काव करें।
एन्थ्रेंक्नोज, जड़ सड़न या तना गलन, लीफ स्पॉट या सरकोस्पोरा धब्बा रोग :- कार्बेन्डाजिम 12% + मैन्कोजेब 63% की 750 से 1000 ग्राम मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।
मक्का में रोग एवं कीट नियंत्रण के उपाय
फॉल आर्मीवार्म रोकथाम :- इमामेक्टिन बेंजोएड 5% SG, 100 ग्राम प्रति एकड़ या स्पिनेटोरम 11.7% SC, 100 ml मात्रा को 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
तना छेदक रोकथाम :- क्विनालफॉस 25 % EC, 400 ml प्रति एकड़ 150 से 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें या थायोमेथोक्सम + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन (125मिली/हे) का छिड़काव करें।
पत्ती झुलसा रोग रोकथाम :- मैंकोजेब 75% WP, 750-100 ग्राम मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
तना सडन रोकथाम :- कॉपर ऑक्सिक्लोराईड 50% WP, 1 से 1.25 प्रति हेक्टेयर को 500 से 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।
कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु
कृषक भाई कभी भी खाली पेट छिडकाव न करें।
छिडकाव करने से पहले किसान भाई अपने मुंह को अच्छे से कवर कर, हाथो में दस्ताने अवश्य पहने।
छिडकाव करने का सबसे उत्तम समय सुबह 11:00 बजे तक है, क्योकि इस समय पौधे के स्टोमेटा खुले होने के कारण पौधो द्वारा दवाई जल्दी अवशोषित कर ली जाती है एवं मित्र कीट भी सुबह के समय कम सक्रिय होने के कारण उनको नुकसान कम होता है।
किसान भाई तेज धूप एवं हवा के विपरीत छिडकाव करने से बचे क्योकि तेज धूप में वाष्पोत्सर्जन एवं वाष्पीकरण के कारण पौधो की पत्तियों से दवा का असर जल्दी खत्म हो जाता है।
किसान भाई छिडकाव हेतु कुऐं या नलकूप का साफ पानी ही इस्तेमाल करें। कृषक भाई छिडकाव सुबह या शाम के समय करें।
