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अमोरा में धूमधाम से हुआ भोजली विसर्जन

 अमोरा में धूमधाम से हुआ भोजली विसर्जन 


मित्रता और भाईचारे के संकल्प के साथ संपन्न हुआ पर्व



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


जाँजगीर चाँपा — आज प्रदेश भर में छत्तीसगढ़ का लोक पारंपरिक भोजली त्यौहार उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में जिले के नवागढ़ विकासखण्ड अंतर्गत आने वाले मां शंवरीन दाई की पावन धरा ग्राम अमोरा (महन्त) में भी रक्षाबंधन के दूसरे दिन मनाये जाने वाले इस पारम्परिक लोकपर्व पर सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। गांव के लम्बरदार परिवार की तरफ से योगेश तिवारी (कामधेनु सेना के छग प्रदेश सचिव) ने सुबह से ही गांव के सभी देवी - देवताओं के आवाहन और विधिवत पूजन हेतु लखेश बैगा को श्रीफल / पुष्प और अगरबत्ती सौंप दिया था। शाम को महिलाओं और युवतियों द्वारा रक्षाबंधन पर बोई गई भोजली (गेहूं) की टोकनियों को सिर पर रखकर लोकगीत गाते गांव का भ्रमण करते हुये देवरहा तालाब तट पर ले जाया गया। यहां गांव के बैगा द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना की गई और उसके बाद सभी ने अपना - अपना भोजली विसर्जन किया।इस अवसर पर एक-दूसरे को भोजली देकर "भोजली" की शुभकामनायें दी गईं और आजीवन मित्रता निभाने का संकल्प लिया गया। भोजली विसर्जन के साथ ही लोगों ने सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की। विसर्जन स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक , महिलायें , युवा और बच्चे उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पारम्परिक वाद्य यंत्रों  के साथ भोजली लोकगीतों ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में गांव के युवा सरपंच राकेश कश्यप , चंद्रहास साहू , भूपेन्द्र यादव , पद्मा कश्यप , भारती साहू , आशु साहू , आरती साहू , गीतांजली कश्यप , आकांक्षा कश्यप , निखिल साहू , लाला मरावी , सीताराम कश्यप सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। गौरतलब है कि अच्छे फसल और खुशहाली की कामना के लिये अपने अपने घरों में लोग छोटी - छोटी टोकनी में भोजली बोते हैं। फिर बच्चियांँ उन भोजली की टोकरियों को सिर पर लेकर बाजे गाजे के साथ नदी या तालाब में विसर्जन के लिये निकलती हैं। इस दौरान उनके द्वारा देवी गंगा देवी गंगा लहर तुरंगा हमर भोजली दाई के भीजे आठो अंगा गीत गाये जाते हैं। गांँव , नगर में भ्रमण कर नदी तालाब में भोजली का पूजा पाठ कर विसर्जन करते हैं.. उसके बाद एक दूसरे को भोजली देते हैं भोजली देकर बड़ो का आशीर्वाद लिया जाता है। वहीं हम उम्र के लोग एक दूसरे की कान में भोजली रखकर दोस्ती निभाने का संकल्प भी लेते हैं। जिसके बाद दोस्ती ऐसी पक्की हो जाती है कि एक दूसरे का नाम नही बल्कि मितान बोलकर ही सम्बोधन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन एक दोस्त बनने के बाद जीवन भर मित्रता निभाने के संकल्प का पालन करते हैं। हालांकि अब शहरो में यह परम्परा कम ही दिखाई देती है मगर गांवो में इसे पूरे उत्साह के साथ उत्सव की तरह ही मनाया जाता है।

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