श्रमण धारा प्रवचन माला
व्यक्ति जीवन भर शुभ मुहूर्त के चक्कर में लगा रहता है।
जैन समाज राघौगढ़ ने चातुर्मास कलश स्थापना का निमंत्रण जिला पंचायत अध्यक्ष को दिया। राघौगढ़ 1 अगस्त। ऐतिहासिक प्राचीन धर्म नगरी राघौगढ़ में चातुर्मास कर रहे आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने श्रमण धारा प्रवचन माला के अन्तर्गत आज "शुभ मुहूर्त क्या है" इस विषय पर मंगल उपदेश देते हुए कहा व्यक्ति का जन्म बिना मुहूर्त के होता है और मृत्यु भी बिना मुहूर्त के होती है। इसके बाद भी व्यक्ति जीवन भर शुभ मुहूर्त के चक्कर में फसा रहता है। हमारा मन जिस कार्य को जिस समय करने का कहे उस कार्य को इस समय शुरू कर देना चाहिए यही शुभ मुहूर्त है
मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए कहा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम एवं महासती सीता के विवाह की कुंडली का मिलन गुरु वशिष्ठ जी ने किया था इसके बाद भी उन्हें 14 वर्ष वनवास रहना पड़ा एवं महा सती सीता का रावण ने अपहरण किया। परम पूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य समय सागर जी महाराज का जन्म शरद पूर्णिमा के शुभ दिन हुआ था। आपने पूछा आज जिनका जन्म शरद पूर्णिमा के दिन होता है क्या वे आचार्य बने हैं।
यहां चातुर्मास कर रहे मुनि श्रवण सागर जी महाराज एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के चातुर्मास कलश स्थापना का भव्य आयोजन आगामी 9 अगस्त रविवार को विद्यासागर सभागार में आयोजित किया जा रहा है। जैन समाज राघौगढ़ के यशस्वी अध्यक्ष सिंघई अशोक कुमार भारिल्य के नेतृत्व में जैन समाज के शिष्ट मंडल ने श्री अरविंद धाकड़ अध्यक्ष जिला पंचायत गुना से भेंट की एवं उन्हें चातुर्मास कलश स्थापना दिवस कार्यक्रम मेंपधारने का आमंत्रण दिया।
