कैमरे की कला के पुरोधा थे गणपत राव पवार, फोटोग्राफर एसोसिएशन ने किया भावपूर्ण स्मरण
विश्व छायांकन दिवस पर देवास के प्रथम फोटोग्राफर एवं आर्टिस्ट को किया नमन,संस्मरणों के जरिए याद किया योगदान
देवास, अभिनय मोरे।
19 अगस्त विश्व छायांकन दिवस (विश्व फोटोग्राफी) डे के अवसर पर देवास फोटोग्राफर एसोसिएशन द्वारा देवास स्टेट के प्रथम फोटोग्राफर एवं आर्टिस्ट व बहुआयामी कलाकार स्वर्गीय गणपत राव पवार का भावपूर्ण स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। लक्ष्मीपुरा स्थित श्री क्षत्रिय मराठा समाज पब्लिक ट्रस्ट के समाज भवन में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वर्गीय पवार के व्यक्तित्व, कला-साधना और फोटोग्राफी के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान को याद करते हुए उन्हें देवास के फोटोग्राफी जगत का मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत बताया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा स्वर्गीय गणपत राव पवार के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अरविंद त्रिवेदी ने कहा कि लगभग एक शताब्दी पूर्व फोटोग्राफी आज की तरह सहज और आधुनिक तकनीक से संपन्न नहीं थी। उस दौर में कांच के नेगेटिव तैयार करना और विशेष तकनीक से तस्वीरों को आकार देना अपने आप में कठिन साधना थी। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में गणपत राव पवार ने फोटोग्राफी को केवल व्यवसाय नहीं,बल्कि कला और साधना के रूप में अपनाया। अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर उन्होंने देवास में फोटोग्राफी को एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि देवास स्टेट के प्रथम फोटोग्राफर के रूप में पवार का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार रमेश भावसार ने स्वर्गीय पवार से जुड़े आत्मीय संस्मरण साझा करते हुए कहा कि बचपन में वे राजबाड़ा स्थित पवार के घर जाया करते थे और उन्हें स्नेह से ‘आबा’ कहकर संबोधित करते थे। उन्होंने बताया कि पवार के सबसे छोटे पुत्र प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं तबला वादक अनिल पवार उनके मित्र हैं। भावसार ने कहा कि गणपत राव पवार साहब का व्यक्तित्व किसी एक कला तक सीमित नहीं था। वे फोटोग्राफी के साथ मूर्तिकला, लेखन और भजन गायन सहित विभिन्न कलाओं में पारंगत थे। उन्होंने फोटोग्राफी की कला को अपने परिवार में विकसित किया और उनके चौथे पुत्र स्वर्गीय प्रेमराव पवार ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पवार की कला की ख्याति देवास तक सीमित नहीं रही। इंदौर,उज्जैन सहित पूरे मालवा क्षेत्र में उनकी फोटोग्राफी और कलात्मक प्रतिभा का सम्मान था। उनके द्वारा स्थापित कला परंपरा को पवार परिवार ने आगे बढ़ाया और आज भी परिवार के अनेक सदस्य अपनी रचनात्मक प्रतिभा से इस विरासत को समृद्ध कर रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि आज फोटोग्राफी अत्याधुनिक कैमरों,डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दौर में पहुंच चुकी है,लेकिन एक अच्छी तस्वीर के पीछे की दृष्टि,धैर्य, कल्पनाशीलता और सृजनात्मकता का महत्व आज भी कायम है। गणपत राव पवार का जीवन नई पीढ़ी को यह संदेश देता है कि तकनीक बदल सकती है,लेकिन कला के प्रति समर्पण और साधना कभी पुरानी नहीं होती। विशेष अतिथि पवार के पुत्र माणिक राव पवार ने बताया कि पिता ने जिस तरह से संघर्ष कर इस कला को आगे बढ़ाया ओर देवास का नाम दूर दूर तक प्रसिद्ध किया।
कार्यक्रम की भूमिका स्वर्गीय गणपत राव पवार के पौत्र अमित राव पवार ने रखी। एवं अतिथि परिचय एशोसिएशन के मार्गदर्शन राजू पुराणिक ने दिया। अतिथियों का स्वागत प्रवीण चौहान,मुकेश नागर,प्रदीप श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ फोटोग्राफर राजेंद्र व्यास एवं मोहन सिंह राजपूत को सम्मानित किया। एव उनके द्वारा लगाइ गई छायाचित्र प्रदर्शनी का भी सभी ने अवलोकन किया। कार्यक्रम का संचालन एसोसिएशन के संयोजक देवेंद्र गौड़ ने किया। तथा आभार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र शर्मा ने माना। इस कार्यक्रम में मराठा समाज अध्यक्ष सुभाष शिंदे,अशोक सोमानी,शर्मिला काटे,बाला पलसे,उमेश निम्बारकर,सुरेश जायसवाल, मुकेश दरबार,प्रदीप नाथ बड़ी संख्या में फोटोग्राफर, समाजजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उक्त जानकारी एसोशिएशन सदस्य पप्पू शर्मा ने दी।
