राघौगढ़ में श्री रक्षाबंधन महामंडल विधान
व्यक्ति के व्यक्तित्व की पहचान उसकी वाणी से होती है। मुनि श्रमण सागर जी
राघौगढ़ 26 अगस्त। ऐतिहासिक धर्म नगरी राघौगढ़ में चल रहे श्री रक्षाबंधन महामंडल विधान के अवसर पर औजस्वी वक्ता, महान तपस्वी, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने "व्यक्ति की पहचान" विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा व्यक्ति दो तरह के होते हैं जो स्वयं को पहचान कर सत् मार्ग पर चलकर आत्म कल्याण करते हैं, हैं। दूसरे वह होते हैं जो दूसरों को पहचान कर उनके अनुरूप चलने का प्रयास करते हैं।
मुनिराज ने कहा व्यक्ति की पहचान उसकी धन दौलत से नहीं होती, उसके अच्छे कपड़ों से नहीं होती, उसकी अच्छी क्रियाओं के माध्यम से भी नहीं होती, और हम व्यक्ति को उसके विचारों से भी नहीं जान सकते कि वह कैसा है। आज के जमाने में व्यक्ति गिरगिट की तरह रंग बदल लेता है आपने कहा आधुनिक जमाने में गिरगिट भी आत्महत्या करने लगे हैं। गिरगिट के आत्महत्या नोट में लिखा मेरा काम समाप्त, अब मेरा काम मनुष्य करने लगे हैं।
मुनि श्रमण सागर जी ने प्रवचन में तर्कों के माध्यम से बताया कि व्यक्ति का व्यक्तित्व उसकी वाणी से जाना जाता है। आपने कहा पुराने जमाने में नाती पोता अपने दादा-दादी के साथ खेलते थे और खेल-खेल में ही दादा-दादी उन्हें अच्छी संस्कार दे देते थे। आज का जमाना यह आ गया है कि माता-पिता अपने बच्चों को दादा-दादी से दूर रहने की हिदायत दे रहे हैं। पहले बच्चे आदर से माताजी, पिताजी, काका जी, मामा जी, मौसा जी कहते थे। आज मोबाइल का जमाना है आज बच्चे आदर देना भूल गये उन्हें 2 जी,3 जी,4 जी, 5 जी और जैन जी याद है। वचनों में सुधार करना होगा। वाणी को वीणा बनाओ वाण नहीं।
आज राघौगढ़ में श्री रक्षाबंधन महामंडल विधान अनुष्ठान की धार्मिक क्रियाओं का शुभारंभ प्रातः 6:30 बजे से भगवान का अभिषेक शांति धारा से हुआ। मुनि श्रमण सागर जी एवं ओंकार सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में उपसर्ग विजेता 300 मुनि राजों का भक्ति भाव से स्मरण कर उन्हें अर्थ चढ़ाए गए। धार्मिक अनुष्ठान के मार्गदर्शक बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य तरुण भैया इंदौर ने कहा राघौगढ़ नगर वासियों का सौभाग्य है कि इस विधान के माध्यम से 700 मुनि राजों की आराधना कर उन्हें अर्थ अर्पित किए जा रहे हैं। राघौगढ़ नगर में चातुर्मास कर रहे दो मुनि राजों के पावन सानिध्य में यह धार्मिक अनुष्ठान करने का सौभाग्य मिला है। आपने कहा जैन धर्म के अनुसार आज के दिन
700 मुनि राजों पर उपसर्ग दूर हुआ था। इस उपलक्ष्य में यह रक्षाबंधन पर्व मनाया जाता है।
