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आरोन में जैन मुनिश्री के साथ अभद्रता पर जैन समाज ने किया थाने का घेराव एवं चौराहे पर चक्काजाम

 आरोन में जैन मुनिश्री के साथ अभद्रता पर जैन समाज ने किया थाने का घेराव एवं चौराहे पर चक्काजाम


👉 *पुलिस ने अपराधी पर किया मामला दर्ज*



*आरोन*।आरोन में चातुर्मास हेतु विराजमान जैनाचार्य विद्यासागरजी महाराज के शिष्य मुनिश्री  निरोग सागर महाराज के संघस्थ मुनि श्री निर्मोह सागरजी महाराज के साथ अभद्रपूर्ण व्यवहार और गाली गलौज की घटना से  स्थानीय जैन समाज में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। बड़ी संख्या में समाज के लोग थाने पहुंच गए और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया।

इस घटना से युवाओं में आक्रामक विरोध एवं आक्रोश देखने को मिला जैन समाज के पदाधिकारियों ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के साथ साथ भारतीय साधु संस्कृति के भी खिलाफ हुई घटना निरूपित किया। जैन समाज नेके  पदाधिकारियों ने 

चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि नगर में इन दिनों मुनिश्री निरोग सागरजी महाराज का चार मुनियों सहित चातुर्मास चल रहा है। पुलिस में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार गुरुवार सुबह लगभग 11:21 बजे मुनिश्री निर्मोह सागरजी आहारचर्या के बाद मंदिर लौट रहे थे। इसी दौरान प्रताप जैन के घर के सामने कीर्ति सोलंकी और पूजा सोलंकी ने मुनिश्री के साथ अभद्र व्यवहार किया तथा जैन समाज के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि उक्त दोनों महिलाओं ने यह बात तक कही कि यदि भविष्य में जैन समाज का कोई साधु महात्मा इस रास्ते से निकला तो उसे जान से खत्म कर देंगे। इस घटना से मौके पर मौजूद समाजजन स्तब्ध रह गए और देखते ही देखते पूरे नगर में इसकी जानकारी फैल गई। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस एक महिला को गिरफ्तार कर थाने ले गई।

घटना के विरोध में सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विजय कुमार जैन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग आरोन थाने पहुंचे। समाज ने लिखित आवेदन देकर कहा कि मुनिश्री के साथ किया गया दुर्व्यवहार पूरे जैन धर्म का अपमान है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत के आधार पर कीर्ति सोलंकी और पूजा सोलंकी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 296(बी), 351(3) तथा 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जैन समाज का कहना है कि साधु-संतों का सम्मान भारतीय संस्कृति की पहचान है और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। समाज ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ शीघ्र और कठोर कार्रवाई की मांग  की है। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के उपरांत क्षेत्र में व्याप्त तनाव दूर हो गया है।

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