एम्स के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल हुये उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के तीसरे दीक्षांत समारोह में शामिल होकर कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल उत्सव का क्षण नहीं है , बल्कि जिम्मेदारी का भी अवसर है। आज युवाओं को जो डिग्रियां मिल रही हैं और कल इससे कहीं अधिक मूल्यवान जिम्मेदारी सौंपी जायेगी- भारत की जनता का स्वास्थ्य , विश्वास और जीवन। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2012 में स्थापना के बाद से एम्स रायपुर ने मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवाओं , चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़ी क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि बेहद कम समय में यह संस्थान छत्तीसगढ़ सहित पड़ोसी राज्यों के लिये एक प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित हुआ है और ग्रामीण एवं आदिवासी समुदायों तक भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवायें पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि एम्स रायपुर का विकास छत्तीसगढ़ में हो रहे उल्लेखनीय परिवर्तन को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में दशकों से चली आ रही चुनौतियों का जिक्र करते हुये उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक स्थिति, आवागमन की खराब सुविधा और वामपंथी उग्रवाद ने विकास में गंभीर बाधायें खड़ी की। कई दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में भय और हिंसा ने सड़कों , स्कूलों और अस्पतालों के विकास को बाधित कर दिया , जिससे समुदायों को आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में दूरी और अभाव का सामना करना पड़ता था। उपराष्ट्रपति ने अपने उदबोधन में आगे कहा कि छत्तीसगढ़ आज अपने अतीत के अंधकार से निकलकर समृद्धि , विकास और प्रगति के एक नये युग की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व , केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रणनीतिक संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रतिबद्ध नेतृत्व को दिया। दशकों से चले आ रहे नक्सली खतरे का अंत हो गया है और जिन क्षेत्रों को कभी हिंसा के लिये जाना जाता था , उन्हें अब सड़कों , स्कूलों , अस्पतालों , रोड़ कनेक्टिविटी , निवेश और अवसरों के लिये जाना जाने लगा है। उन्होंने कहा यह परिवर्तन इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति , दृढ़ सुरक्षा नीति और विकासोन्मुखी शासन में कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता हैं। उपराष्ट्रपति ने एम्स रायपुर को नये छत्तीसगढ़ के बेहतरीन प्रतीकों में से एक बताया , जो भय और अभाव के युग से शांति, प्रगति और संभावनाओं के युग की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने उन्नत स्वास्थ्य सेवा और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की भी सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ में किये गये पहले किडनी प्रत्यारोपण , किडनी प्रत्यारोपण में 95 प्रतिशत से अधिक सफलता दर , कॉर्नियल प्रत्यारोपण और कान प्रत्यारोपण को महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में उल्लेख किया , जो यह दर्शाती हैं कि इस क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा कितनी तेजी से सुलभ हो रही है। उन्होंने कहा कि हृदय प्रत्यारोपण कार्यक्रम की मंजूरी एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्नातकों को संबोधित करते हुये उप राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवा स्नातकों से हमेशा दृढ़ता से "नशीली दवाओं को ना" कहने और एक ऐसे भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया , जहां प्रौद्योगिकी सभी नागरिकों तक पहुंचे और प्रत्येक युवा भारतीय एक बेहतर भविष्य की आकांक्षा कर सके। उन्होंने कहा कि आपका ज्ञान स्वास्थ्य प्रदान करे , आपका शोध नवाचार लाये और आपकी सेवा प्रेरणा दे। इसी कड़ी में राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा केवल ज्ञान और कौशल तक सीमित नहीं है , बल्कि इसमें धैर्य , करुणा और गहरी जिम्मेदारी की भावना भी आवश्यक है। चिकित्सा का वास्तविक उद्देश्य मानवता की सेवा है और एक चिकित्सक की श्रेष्ठता केवल उसकी पेशेवर दक्षता से नहीं , बल्कि मरीजों के साथ किये जाने वाले व्यवहार , विश्वास और सम्मान से भी निर्धारित होती है। उन्होंने सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिये हार्दिक बधाई देते हुये उनके उज्ज्वल , सफल एवं संतोषप्रद भविष्य की शुभकामनायें दीं। केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने भी विद्यार्थियों को बधाई दी और आयुष्मान भारत , PM-JAY ABHA और e-Sanjeevani जैसी राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों का उल्लेख करते हुये युवा डॉक्टरों से चिकित्सा उत्कृष्टता के साथ करुणा , नैतिकता , निवारक स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और समाज सेवा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने संस्थान की प्रगति और उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुये चिकित्सा शिक्षा , शोध , नवाचार और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं में उच्च मानकों को बनाये रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने स्मृातक विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और पेशेवर कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र की सेवा में करने का आह्वान किया। दीक्षांत समारोह का प्रमुख आकर्षण विभिन्न चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान पाठ्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले विद्यार्थियों को 689 डिग्री प्रमाण-पत्रों का वितरण रहा। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को 16 पुरस्कार भी प्रदान किये गये। यह अवसर विद्यार्थियों , उनके परिवारों , शिक्षकों और पूरे एम्स रायपुर परिवार के लिये गर्व और खुशी का क्षण रहा। समारोह में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित और एम्स रायपुर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) संजीव हांडा और एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह में ‘नसे को ना कहे’ की शपथ भी दिलाई गई।
