उत्तम आर्जव धर्म पर मंगल प्रवचन
सरलता स्वर्ग- मोक्ष का सोपान है कुटिलता नर्क का द्वार। मुनि श्रमण सागर जी
राघौगढ़ 18 सितंबर। जैन धर्म के दस लक्षण महापर्व के पावन अवसर पर आज तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म पर मंगल प्रवचन करते हुए आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा और आर्जव धर्म से हमें यह शिक्षा लेना चाहिए कि जीवन में हर क्षेत्र में राजनीतिक, सामाजिक, व्यापारिक क्षेत्र में मिथ्याचार, कुटिलता, छल- कपट का त्याग कर सरलता को ग्रहण करना चाहिए। आपने कहा आप ईमानदार हैं सदाचारी हैं एवं आपके व्यापार में अच्छा माल होगा तो ग्राहक आपके यहां ही आएंगे। वर्तमान में यह देखने में आ रहा है कि व्यक्ति हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए छल- कपट कर रहा है छल- कपट कर प्राप्त की सफलता स्थायी नहीं होती है। कर्म सिद्धांत है कि हमारे द्वारा किए गए कर्मों का फल हमें अवश्य मिलता है। मुनिराज ने कहा विपरीत परिस्थितियों में अपने परिणामों को साधना ही सच्ची साधना है। जीवन में अनुकूलता में तो को सभी पूछते है। अनुकूलता में तो कुत्ता भी आपके आगे पीछे पूछ लाता है।प्रतिकूलता में अपने भी मुंह मोड़ लेते हैं। अनुकूलता एवं प्रतिकूलता में सरल भाव रखना ही उत्तम आर्जव धर्म का पावन संदेश है।
मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा वर्तमान पंचम काल दुखों से भरा हुआ है। इस काल में हमारा जन्म भारत देश में, जैन कुल में हुआ है। जैन धर्म का अहिंसा का संदेश भगवान महावीर का पवन संदेश जियो और जीने दो अपनाने का अवसर मिला है। हमे इस सदी के महान संत आचार्य विद्यासागर जी जैसे मुनिराज नग्न दिगंबर भेष में मिले। यह सब अनुकूलता ही हमारे पूर्व जन्म के अच्छे कर्मों का पूर्ण फल है।
दस लक्षण पर्व के पावन अवसर पर प्रतिदिन प्राप्त 7 बजे भगवान का अभिषेक एवं शांति धारा होती है। शांति धारा का वाचन मुनि ओंकार सागर जी महाराज के श्री मुख से होता है। आज शांति धारा के पुण्यार्जक परिवार विनय कुमार वासु कुमार,संतोष कुमार अभिनव कुमार परिवार, रमेश चंद मनीष कुमार आमल्या परिवार, विनय कुमार आकाश कुमार बिल्डिंग मटेरियल परिवार रहे। दोपहर में मुनि संघ के पावन सानिध्य में जैन समाज की दस महिलाओं ने जैन ग्रंथ तत्वार्थ सूत्र के सभी दस अध्यायों को कंठस्थ कर सुनाया।
