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राग और द्वेष का त्याग का संदेश हमें उत्तम त्याग धर्म देता है। मुनि श्रमण सागर जी

 उत्तम त्याग धर्म पर प्रवचन

राग और द्वेष का त्याग का संदेश हमें उत्तम त्याग धर्म देता है।      मुनि श्रमण सागर जी 

विधायक जयवर्धन सिंह को श्रमण धारा पुस्तक मुनिराज ने भेंट की।


 राघौगढ़ 23 सितंबर। जैन धर्म के पर्व राज दस लक्ष्मण पर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म पर मंगल प्रवचन करते हुए आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, महान तपस्वी, औजस्वी वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा जैन धर्म में चार प्रकार के दान को सर्वोच्च माना है औषधि दान, शास्त्र दान, अभयदान एवं आहार दान यह मुख्य कह गए हैं।वर्तमान स्थिति का उल्लेख करते हुए आपने कहा पहले आहार को ही औषधि के रूप में लेते थे। अब औषधि का ही आहार कर रहे हैं। परोपकार की व्याख्या करते हुए कहा नदी परोपकार के लिए बहती है। गाय परोपकार के लिए दूध देती है। वृक्ष परोपकार के लिए फल देते हैं। आगे यह कहा सज्जनों की संपत्ति परोपकार के लिए है। जितना लूटाओगे ब्याज सहित वापस आएगा। 

                       मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा इन सब दोनों में सबसे बड़ा दान राग और द्वेष का त्याग है। राग और द्वेष का त्याग नहीं करेंगे तो सब दान बेकार है। आपने कविता सुनाई कविता का शीर्षक था "सुखी होने का मूल मंत्र है देखो जानो और जाने दो।" 

                       धर्म सभा में राघौगढ़ के पूर्व मंत्री एवं विधायक जयवर्धन सिंह पधारे अपने महाराज जी के श्री चरणों में श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। विधायक जी ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में कहा राघौगढ़ नगर का सौभाग्य है कि आचार्य विद्यासागर जी महाराज के शिष्य दो मुनि राजो का चातुर्मास राघौगढ़ नगर में हो रहा है। राघौगढ़ नगर के ही मुनि निर्लेप सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा लेकर राघौगढ़ नगर का गौरव बढ़ाया है। आपने मुनिराज से अनुरोध किया कि हिंदूपत पब्लिक स्कूल राघौगढ़ में पढ़ रहे लगभग 1000 छात्र-छात्राओं को मोटिवेशन प्रवचन हेतु पधारे। आपने मुनिराज से अनुरोध किया कि आपके चरण कमल हमारे निवास किले पर पड़ेंगे तो हम धन्य हो जाएंगे। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने उनके काव्य संग्रह श्रमण धारा की कृति विधायक जयवर्धन सिंह को भेंट की। जैन समाज मार्गदर्शक मंडल के सदस्य एवं भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक विजय कुमार जैन ने विधायक जी का स्वागत करते हुए राघौगढ़ में चल रहे श्रमण संस्कार शिविर एवं मुनिराज के चातुर्मास में धर्म की बह रही गंगा का विस्तार से उल्लेख किया। 

अपने जानकारी दी दोनों मुनिराज के पावन सानिध्य में दस लक्षण पर्व में देश के विभिन्न भागों से आए 15 से 30 वर्ष तक के 20 युवक धर्म साधना कर रहे हैं इनका नामकरण विद्याधर किया है ।जैन समाज के यशस्वी अध्यक्ष सिंघई अशोक कुमार भारिल्य के नेतृत्व में विधायक जयवर्धन सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष विजय कुमार साहू उपाध्यक्ष रामस्वरूप मीणा, पार्षदगण कुलदीप कश्यप, चंद्रशेखर बुनकर,श्री लाल कुशवाह आदि का सम्मान किया। सभी के प्रति आभार प्रदर्शन अध्यक्ष सिंघई अशोक कुमार भारिल्य ने किया। कार्यक्रम का संचालन विकास कुमार जैन ने किया।

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