गुना
जिले में नरवाई जलाने पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल द्वारा प्रतिबंध लगाया गया हैं। प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालो के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जायेगी। जिले के कृषकों द्वारा नरवाई जलाने पर जुर्माने की कार्यवाही की जा रही हैं। 02 एकड़ भूमि की नरवाई जलाने पर 2500/- रूपये अर्थदण्ड, 2-5 एकड़ में 5 हजार एवं 5 एकड़ से अधिक भूमि पर 15,000 रूपये का अर्थदण्ड भरना होगा। इसके अतिरिक्त पुलिस कार्यवाही भी की जा सकती हैं।
जिले में नरवाई जलाने पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार एवं उप संचालक कृषि श्री संजीव शर्मा के मार्गदर्शन में नरवाई जलाने की घटनाओं पर लगातार सख्ती बरती जा रही है एवं किसानों को नरवाई न जलाने हेतु लगातार जागरूक करते हुये नरवाई जलाने से होने वाले नुकसानों की जानकारी दी जा रही है। जिले में नरवाई जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित किया गया है। आदेश का उल्लंघन करने वाले विकासखण्ड बमोरी के ग्राम खडेला में 3 किसानों के विरुद्ध मौके पर पहुंचकर पंचनामा तैयार कर जुर्माना लगाने की कार्यवाही हेतु पंचनामा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व गुना को प्रेषित किया गया है। प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन किये जाने पर नरवाई जलाने वाले कृषकों पर एफ.आई.आर. भी कराई जा सकती है।
किसानों के खेतों में नरवाई जलाने की घटनाओं की जानकारी प्रतिदिन सेटेलाईट मॉनिटरिंग के माध्यम से कृषि विभाग एवं राजस्व विभाग को प्राप्त हो जाती है, जिसके आधार पर नरवाई जलाने वाले ग्रामों में राजस्व एवं कृषि विभाग की टीमों द्वारा नरवाई जलाने के स्थान पर तत्काल पहुंचकर पंचनामा एवं प्रकरण तैयार कर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के द्वारा जुर्माने की कार्यवाही निरंतर की जायेगी। हार्वेस्टर से फसल कटाई के उपरांत स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अथवा स्ट्रा रीपर का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
सेटेलाईट रिपोर्ट के अलावा यदि कोई नरवाई जलाने की सूचना प्राप्त होती है तो मौके पर संबंधित कृषि विस्तार अधिकारी को तत्काल भेजकर घटना की पुष्टि होने पर मौके पर आग लगी पाई जाती है तो आवश्यकतानुसार आग बुझाने की कार्यवाही फायर बिग्रेड को सूचित कर मौके पर तुरंत बुलाया जाता है एवं आग बुझाने का कार्य किया जाता है।
किसी कारणवश नरवाई में आग लगने की स्थिति में किसान पानी टेंकर की व्यवस्था करें, खेत के चारो और जुताई करें जिससे पास के अन्य खेतो में आग न फैल सके। नरवाई प्रबंधन हेतु किसान अपने खेतों में रोटावेटर, मिट्टी पलटने वाला हल (प्लाऊ), हेरो इत्यादि से खेत की जुताई कर, फसल अवशेषो को मिट्टी में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है एवं जैविक कार्बन की मात्रा बढ़ जाती है।
