“कौन सा जिला है?” — “गुना जिला…”: एक आवाज़ जिसने फिर से जोड़ दिया जीवन से रिश्ता
गुना
कभी-कभी एक छोटा सा सवाल और उसका साधारण सा जवाब, इंसानियत की सबसे बड़ी कहानी बन जाता है। आज अपने जन्मदिवस के अवसर पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल जब कैंट क्षेत्र स्थित आनंद धाम वृद्ध आश्रम पहुंचे, तो यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं था, यह संवेदनाओं का एक जीवंत पल बन गया।
आश्रम में मौजूद एक बुजुर्ग महिला ने धीमी आवाज़ में अपनी परेशानी बताई, उन्हें सुनाई नहीं देता। यह एक साधारण सी जरूरत थी, लेकिन उनके लिए दुनिया से टूटे रिश्ते को जोड़ने की आस थी। कलेक्टर ने बिना देर किए सामाजिक न्याय विभाग के प्रभारी संचालक श्री अब्दुल गफ्फार को तुरंत सुनने की मशीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कुछ ही पलों में मशीन लगाई गई… और जैसे ही वह चालू हुई, मानो खामोशी की दीवार टूट गई। वर्षों से धुंधली हो चुकी आवाज़ें फिर से साफ सुनाई देने लगीं। कलेक्टर ने मुस्कुराते हुए बुजुर्ग माता से पूछा - यह कौन सा जिला है?” और जवाब आया - “गुना जिला…”। यह सिर्फ एक जवाब नहीं था, यह उस विश्वास की वापसी थी। यह एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि इंसानियत का सजीव उदाहरण था, जहां संवेदना ने कर्तव्य को और भी खूबसूरत बना दिया।
जन्मदिन के मौके पर दिया गया यह उपहार किसी के लिए एक मशीन नहीं, बल्कि फिर से दुनिया को सुनने और महसूस करने का जरिया बन गया। कभी-कभी, सबसे बड़ा तोहफा वही होता है जो किसी को उसकी खोई हुई ‘आवाज़’ लौटा दे।
