अंबाराम चक्क बन रहा अमरूद उत्पादन का नया केंद्र, किसानों में बढ़ा बागवानी के प्रति उत्साह
Guna- बमोरी विकासखंड अंतर्गत ग्राम अंबाराम चक्क में प्रगतिशील कृषक श्री नाथूराम लोधा के अमरूद बगीचे पर अमरूद चौपाल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में किसानों को उन्नत अमरूद उत्पादन, ड्रिप सिंचाई एवं आधुनिक बागवानी तकनीकों की जानकारी दी गई।
चौपाल में उपसंचालक उद्यान जिला गुना श्री केपीएस किरार, वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी श्री राजेंद्र सिंह केन, ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी श्री रामकुमार दिवाकर एवं कृषि विस्तार अधिकारी श्री राजेश जी सहित अनेक किसान उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान श्री नाथूराम लोधा के एक एकड़ अमरूद बगीचे से प्रतिवर्ष 8 से 10 लाख रुपए तक की आय अर्जित होने की जानकारी किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसी से प्रेरित होकर ग्राम अंबाराम चक्क में इस वर्ष लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में नवीन अमरूद बगीचे तैयार किए गए हैं, जबकि लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में किसान आगामी जुलाई माह में पौधारोपण की तैयारी कर रहे हैं।
ग्राम के प्रगतिशील कृषक श्री अमृतलाल पाटीदार द्वारा ब्लैक डायमंड अमरूद का बगीचा ड्रिप सिंचाई प्रणाली के साथ स्थापित किया गया है। ड्रिप तकनीक के माध्यम से 80 से 90 प्रतिशत तक पानी की बचत के साथ सूक्ष्म पोषक तत्वों को सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जा रहा है।
अमरूद चौपाल के दौरान किसानों ने उपसंचालक उद्यान श्री केपीएस किरार के समक्ष अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में अंबाराम चक्क को “अमरूद गांव” के रूप में पहचान दिलाई जाएगी। किसानों का लक्ष्य गांव में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में अमरूद के बगीचे विकसित करना है।
उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष 17 अक्टूबर को माननीय कलेक्टर गुना श्री किशोर कन्याल द्वारा लगभग 400 किसानों के साथ श्री नाथूराम लोधा के बगीचे का भ्रमण किया गया था। इसके बाद से सैकड़ों किसानों ने श्री लोधा से 10 हजार से अधिक थाईपिंक अमरूद पौधे खरीदकर अपने खेतों में लगाए हैं। श्री नाथूराम लोधा ने बताया कि आगामी मानसून सीजन में 40 से 50 हजार पौधों की बिक्री होने की संभावना है।
उपसंचालक उद्यान श्री केपीएस किरार ने अपने उद्बोधन में कहा कि उन्नत किस्म के अमरूद बगीचे किसानों के लिए अत्यधिक लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं। एक एकड़ से 8 से 10 लाख रुपए तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है, जो पारंपरिक खेती की तुलना में कई गुना अधिक है। उन्होंने किसानों को जल संरक्षण हेतु ड्रिप सिंचाई अपनाने एवं आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
चौपाल के माध्यम से क्षेत्र के किसानों में बागवानी फसलों के प्रति उत्साह एवं जागरूकता स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
