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कलेक्‍टर श्री कन्‍याल द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण हेतु तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

कलेक्‍टर श्री कन्‍याल द्वारा दिव्यांगजन सशक्तिकरण हेतु तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ




गुना, 


कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल के मार्गदर्शन में आज जिला कलेक्ट्रेट सभागार में “दिव्यांगजन जागरूकता, संवेदनशीलता एवं समावेशी अभिसरण योजना” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय स्थापित कर समावेशी एवं अधिकार-आधारित सेवाओं को सुदृढ़ करना है।


कार्यशाला को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि जो भी संस्था अथवा फाउंडेशन समाजहित में कार्य कर रही है, उनके प्रयासों का सम्मान किया जाना चाहिए तथा प्रशासन द्वारा ऐसे सकारात्मक कार्यों में हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तीन दिवसीय कार्यशाला का लाभ सभी प्रतिभागियों को मिलेगा, विशेष रूप से उन दिव्यांगजन भाई-बहनों को, जिनके कल्याण एवं सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।


कलेक्टर श्री कन्याल ने समृद्धि केंद्र की जानकारी देते हुए बताया कि देश में केवल तीन समृद्धि केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें से एक गुना जिले में संचालित है। उन्होंने बताया कि इस योजना की शुरुआत केंद्रीय मंत्री एवं सांसद श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। समृद्धि केंद्र के माध्यम से दिव्यांगजन को डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रमों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।


कार्यशाला का संचालन पुणे स्थित Shodharambh Research and Development Foundation की विशेषज्ञ टीम द्वारा किया जा रहा है। संस्था के निदेशक एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित विशेषज्ञ श्री समीर घोष ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि गुना जिले में आयोजित यह कार्यशाला दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से संचालित राष्ट्रीय पायलट पहल का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस मॉडल पर देश के 10 जिलों में कार्य किया जाना प्रस्तावित है तथा इस पहल के प्रथम जिले के रूप में गुना का चयन होना जिले के लिए गौरव का विषय है।


उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य केवल जागरूकता तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, सामाजिक न्याय, आजीविका, लोक निर्माण, आपदा प्रबंधन, जल एवं स्वच्छता जैसे विभागों के मध्य समन्वित एवं समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करना भी है, ताकि दिव्यांगजन हेतु प्रभावी सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें।


कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को अनुभवात्मक गतिविधियों, संवाद एवं समूह अभ्यासों के माध्यम से दिव्यांगजन से जुड़े सामाजिक, व्यवहारिक एवं प्रशासनिक पहलुओं के प्रति संवेदनशील बनाया जाएगा। साथ ही समावेशी संचार, विभागीय भूमिकाएं, आपदा प्रबंधन में दिव्यांगजन की आवश्यकताएं तथा रिजल्ट बेस्ड मैनेजमेंट जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की जाएगी।


आज आयोजित कार्यशाला में डॉ. प्रवीक वशिष्ठ, प्रॉस्थेटिस्ट एवं ऑर्थोटिस्ट तथा पुनर्वास विशेषज्ञ (दिल्ली) एवं सुश्री कृपाली बिदाये, समावेशन एवं इंटरसेक्शनैलिटी विषय की विशेषज्ञ परामर्शदाता (मुंबई) द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों का संचालन किया जाएगा। कार्यशाला के माध्यम से जिला स्तर पर ऐसी समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे भविष्य में योजनाओं, सेवाओं एवं संसाधनों तक दिव्यांगजन की पहुंच और भागीदारी को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। आज कार्यशाला के दौरान सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग श्री दिनेश चंदेल सहित संबंधित विभाग के अधिकारी/कर्मचारी उपस्थित रहे।

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