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समाज में नशे के खिलाफ सामाजिक डर पैदा करना जरूरी, तभी आएगा बदलाव: कलेक्टर

 समाज में नशे के खिलाफ सामाजिक डर पैदा करना जरूरी, तभी आएगा बदलाव: कलेक्टर


एक वर्ष तक हर माह बताएं अपने क्षेत्र में कितना परिवर्तन लाए,


जिला और पुलिस प्रशासन हर संभव सहयोग करेगा



Guna- सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत गुरुवार को कलेक्ट्रेट के जनसुनवाई कक्ष में जिला स्तरीय मास्टर वॉलंटियर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कलेक्टर श्री किशोर कुमार ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रतिभागियों से कहा कि नशा मुक्ति केवल सरकारी अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन है, जिसमें पूरे समाज की भागीदारी आवश्यक है।

कलेक्टर श्री कुमार ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में नशा मुक्ति अभियान प्रमुख है। इसे लेकर नियमित रूप से एनकॉर्ड (NCORD) की बैठकें आयोजित की जाती हैं तथा अभियान की प्रगति की सतत समीक्षा की जाती है। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि प्रशिक्षण में प्राप्त जानकारी को जमीनी स्तर पर लागू करें और जहां भी आवश्यकता महसूस हो, वहां जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह आपके साथ खड़ा है।


समाज का डर ही नशे के खिलाफ सबसे बड़ी ताकत

कलेक्टर ने कहा कि नशे की रोकथाम के लिए सबसे जरूरी है कि समाज में इसके प्रति अस्वीकार्यता और सामाजिक जवाबदेही विकसित हो। व्यक्ति को यह महसूस होना चाहिए कि यदि वह नशे की ओर बढ़ेगा तो परिवार, पड़ोसी और समाज उसे समझाएगा तथा गलत रास्ते पर जाने से रोकेगा। जब समाज स्वयं नशे के खिलाफ खड़ा होगा, तभी इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।


हर माह समीक्षा, एक साल में दिखना चाहिए बदलाव

उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त मास्टर वॉलंटियर्स से कहा कि अगले एक वर्ष तक प्रत्येक माह प्रशासन के साथ बैठक कर अपने क्षेत्र में किए गए प्रयासों और आए बदलाव की जानकारी दें। इससे अभियान के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा और आवश्यकता अनुसार आगे की रणनीति बनाई जाएगी।


युवाओं को नशे से बचाने और उपचार की दी गई जानकारी

प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा युवाओं को नशे से बचाने के उपाय, नशे के आदी व्यक्तियों की पहचान, परामर्श एवं उपचार की प्रक्रिया तथा विभिन्न प्रकार के मादक पदार्थों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि नशे की समस्या केवल व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करती है, इसलिए इसकी रोकथाम में सामुदायिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।


नशा छोड़ना चाहते हैं लाखों लोग, जरूरत है सही मार्गदर्शन और उपचार की


प्रशिक्षण में विशेषज्ञों ने बताया कि नशे की लत केवल व्यक्ति की आदत नहीं, बल्कि एक ऐसी समस्या है जिससे बाहर निकलने के लिए उपचार, परामर्श और सामाजिक सहयोग की आवश्यकता होती है। भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय तथा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एम्स) द्वारा किए गए राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार देश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो नशे का सेवन करते हैं, जबकि लाखों लोग इससे मुक्त होना चाहते हैं। कई लोग स्वयं प्रयास करने के बावजूद नशा नहीं छोड़ पाते, क्योंकि यह शारीरिक और मानसिक निर्भरता का रूप ले लेता है। विशेषज्ञों ने कहा कि ऐसे व्यक्तियों को समय पर परामर्श, उपचार और पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना आवश्यक है, ताकि वे नशामुक्त जीवन की ओर लौट सकें और समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जुड़ सकें।आज उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल, विशिष्ट अतिथि सीईओ जनपद गुना सुश्री योगिता परमार, म.प्र. स्टेट ट्रेनिंग कॉर्डिनेटर एवं मास्टर ट्रेनर नशा मुक्त भारत अभियान भोपाल डॉ. अतुल कुमार रायजादा, प्रशिक्षक समन्व्यक श्री नीरज बांदिल, मनोचिकित्सिक डॉ. राजेन्द्र भाटी, कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग श्री अब्दुल गफ्फार, सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास श्री दिनेश चंदेल, श्री मोहन सिंह सिसोदिया सहित संबंधित विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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