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राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला चमत्कार मूर्ति में नहीं हमारी सच्ची श्रद्धा में होता है

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला 

चमत्कार मूर्ति में नहीं हमारी सच्ची श्रद्धा में होता है


 राघौगढ़ 26 जुलाई। प्राचीन धर्मनगरी राघौगढ़ में ससंघ विराजमान दिगंबर जैन मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने चमत्कार शब्द पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा  चमत्कार भगवान की प्रतिमा, मंत्र एवं गुरु जनों के आशीर्वाद में होना हम मानते हैं। मगर सच्चा चमत्कार तभी माना जाता है जब हमारी श्रद्धा अटूट एवं अमित हो। आपने कहा महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा बनाकर एकलव्य नामक केवट पुत्र ने धनुर्विद्या सीख ली। यह उनकी गुरू की मूर्ति के प्रति अटूट श्रृद्धा का परिणाम था। जैन दर्शन में उल्लेख है अंजन चोर नामक कुख्यात चोर जिसे णमोकार नहीं मंत्र नहीं आता था उसने णमोकार मंत्र पर अतुल श्रद्धा की और जाप दिया आणम ताणम सेठ वचन प्ररमाणम् और वह णमोकार मंत्र को सिद्ध करने में सफल हो गया। इसी प्रकार आपने डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों विराजमान आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा संघस्थ एक मुनिराज जिनकी आंखों की रोशनी काम हो गई थी। वेद्य जी ने उन्हें निराश कर दिया था। उन मुनिराज ने श्रद्धापूर्वक आचार्य विद्यासागर जी महाराज से आशीर्वाद लिया और उनका बीमारी ठीक हो गई। आपने विश्वास पूर्वक कहा हर प्रतिमा में चमत्कार है राघौगढ़ में विराजमान प्रतिमाओं में भी चमत्कार हैं। यह चमत्कार हमें तभी देखने को मिलेगा जब हमारी श्रृद्धा अटूट होगी। हमारी आज स्थिति यह हो गई है कि हम चमत्कार पाने के लिए पागल होकर घूम रहे हैं। श्रृद्धा को मजबूत नहीं कर रहे हैं। पूज्य मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा महा सती सीता जी अग्नि परीक्षा में सफल हुई। जैन आचार्य समंत भद्र स्वामी ने बनारस में चंद्र प्रभु स्वामी की प्रतिमा प्रकट की यह उनकी अटूट श्रृद्धा का ही परिणाम था 

नवाचार्य समय सागर जी महाराज की आज्ञा से राघौगढ़ नगर में चातुर्मास हेतु मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज पधारे हैं।  प्रतिदिन मुनि श्रमण सागर जी महाराज के सानिध्य में युवक युवतियों की मोटिवेशन क्लास प्रातः 6:45 बजे से प्रारंभ होती है। रविवार को स्कूलों में अवकाश के दिन कक्षा 8 से 12 तक के छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया था। सभी छात्र-छात्राओं को मुनिराज ने जीवन में सफल होने, चुनौतियों का सामना करने, अगर कभी असफलता आ जाए तो घबराना नहीं आदि अनेक ज्ञानवर्धक बातों का मार्गदर्शन दिया। रविवार को प्रातः 8:00 बजे आचार्य विद्यासागर जी महाराज की सामूहिक पूजन श्री विद्यासागर दिगंबर जैन पाठशाला के नन्हे मुन्ने बच्चों ने संगीतमय की।

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