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पॉलीहाउस निर्माण से गुलाब पैकिंग तक सीखे वैज्ञानिक तरीके, युवा किसानों ने दिखाई विशेष रुचि

 पॉलीहाउस निर्माण से गुलाब पैकिंग तक सीखे वैज्ञानिक तरीके, युवा किसानों ने दिखाई विशेष रुचि

कलेक्टर ने रखा विजन—बेहतर गुणवत्ता, मजबूत ब्रांड, 7 लाख फूल उत्पादन और 25 से 30 लाख रुपए तक प्रति एकड़ शुद्ध लाभ


गुना 

जिले में गुलाब की वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक खेती को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की दिशा में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बेंगलुरु से आए विशेषज्ञों ने किसानों को आधुनिक गुलाब उत्पादन की बारीकियां सिखाईं। कलेक्टर श्री किशोर कन्याल के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा उद्यानिकी विभाग के सहयोग से आयोजित तीन घंटे के इस प्रशिक्षण में जिले के बड़ी संख्या में युवा किसानों, गुलाब उत्पादकों तथा पॉलीहाउस स्थापित कर रहे कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान एग्रीप्लास्ट कंपनी के अनुभवी एग्रोनॉमिस्ट ने पॉलीहाउस निर्माण के समय बरती जाने वाली सावधानियों से लेकर वैज्ञानिक गुलाब उत्पादन की संपूर्ण तकनीकी प्रक्रिया का विस्तार से प्रशिक्षण दिया। किसानों को मिट्टी परीक्षण, उपयुक्त खाद एवं बेड निर्माण, ड्रिप सिंचाई, फर्टिगेशन, तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन, प्रकाश व्यवस्था, पौधों के बीच उचित दूरी, पौधों के प्रकार का चयन, मल्चिंग, वीडमैट के उपयोग, मिट्टी एवं पानी के पीएच का महत्व, वॉटर सॉल्युबल उर्वरकों का वैज्ञानिक उपयोग, बेंडिंग, पिंचिंग जैसी तकनीकों की व्यवहारिक जानकारी दी गई।

विशेषज्ञों ने गुलाब की विभिन्न बीमारियों एवं कीटों की पहचान, रोकथाम और समेकित प्रबंधन पर भी विस्तार से चर्चा की। साथ ही गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए हार्वेस्टिंग, प्री-कूलिंग, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग तथा बेहतर बाजार तक पहुंच बनाने की आधुनिक तकनीकों से किसानों को अवगत कराया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी विशेषज्ञों ने विस्तार से किया।

इस अवसर पर कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि जिले का लक्ष्य केवल गुलाब का रकबा बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रति एकड़ उत्पादन, गुणवत्ता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रति एकड़ लगभग 5 लाख स्टिक उत्पादन को बढ़ाकर 7 लाख स्टिक तक पहुंचाने, फूलों की गुणवत्ता में सुधार, गुना के किसानों का मजबूत ब्रांड विकसित करने, आधुनिक ग्रेडिंग, पैकेजिंग एवं कोल्ड चेन के माध्यम से फूलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने तथा निर्यात की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा। इससे किसानों का शुद्ध लाभ वर्तमान 15 लाख रुपए प्रति एकड़ से बढ़कर 25 से 30 लाख रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी रणनीति के बल पर जिले में पांच वर्ष से कम समय में 500 एकड़ पॉलीहाउस में गुलाब की खेती का लक्ष्य समय से पहले प्राप्त किया जा सकेगा।

उप संचालक उद्यान श्री के.पी.एस. किरार ने कहा कि किसानों को केवल योजनाओं का लाभ देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीकों से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है। इस प्रकार के विशेषज्ञ प्रशिक्षण किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं, उत्पादन लागत कम करने, गुणवत्ता सुधारने तथा बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन करने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी विभाग आगे भी समय-समय पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा, ताकि गुना के किसान आधुनिक फ्लोरीकल्चर में प्रदेश ही नहीं, देशभर में अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकें।

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