ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द उपार्जन के लिए जिले में चार उपार्जन केन्द्र निर्धारित
गुना
भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के अंतर्गत विपणन वर्ष 2026-27 में ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन 01 जुलाई से 10 अगस्त 2026 तक किया जाएगा। सचिव, मध्यप्रदेश शासन, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, मंत्रालय भोपाल के निर्देशानुसार जिला उपार्जन समिति की अनुशंसा पर जिले में उपार्जन कार्य के लिए चार उपार्जन केन्द्र निर्धारित किए गए हैं। उपार्जन केन्द्रों पर पंजीकृत किसानों से स्लॉट बुकिंग के अनुसार ग्रीष्मकालीन मूंग एवं उड़द का उपार्जन किया जाएगा। उपार्जन कार्य के प्रभावी संचालन एवं सतत मॉनिटरिंग के लिए सहायक संचालक कृषि श्री अरुण पाटीदार मोबाइल 9755160744 को जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार गुना तहसील में सेवा सहकारी समिति पगारा के अंतर्गत एम.पी.डब्ल्यू.एल.सी. बी-2 नानाखेड़ी उपार्जन केन्द्र के नोडल अधिकारी श्री शाहनुल कृषि विस्तार अधिकारी, मोबाइल 9669756845 एवं श्री विनय सिकरवार कृषि विस्तार अधिकारी, मोबाइल 7415646106) को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
इसी प्रकार बमौरी तहसील में सेवा सहकारी संस्था मर्यादित रामपुर कॉलोनी के अंतर्गत स्टॉकअप वेयरहाउस कॉलोनी उपार्जन केन्द्र के श्री राजेश महरोत्रा मोबाइल 9826474489 को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
मधुसूदनगढ़ तहसील में सेवा सहकारी संस्था मर्यादित मधुसूदनगढ़ के अंतर्गत गुलमोहर वेयरहाउस, मधुसूदनगढ़ उपार्जन केन्द्र के श्री संजीव मीना, कृषि विस्तार अधिकारी मोबाइल 9926456090 को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
राधौगढ़ तहसील में सेवा सहकारी संस्था मर्यादित आवन के अंतर्गत मात्रिका वेयरहाउस, आवन उपार्जन केन्द्र के श्री आर.एस. गर्ग, कृषि विस्तार अधिकारी मोबाइल 9425723674 को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
आदेशानुसार सभी उपार्जन केन्द्रों पर सोमवार से शुक्रवार प्रातः 8 बजे से सायं 8 बजे तक उपार्जन कार्य किया जाएगा। शनिवार एवं रविवार को सप्ताह के दौरान उपार्जित शेष स्कंध का परिवहन, भंडारण, लेखा का मिलान तथा अस्वीकृत स्कंध के अपग्रेडेशन एवं वापसी संबंधी प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा।
किसानों द्वारा लाई गई उपज की निर्धारित प्रक्रिया के तहत गुणवत्ता जांच अनिवार्य रूप से की जाएगी। प्रतिदिन लिए गए गुणवत्ता परीक्षण के नमूनों का रिकॉर्ड पंजी में संधारित किया जाएगा। नॉन-एफएक्यू (Non-FAQ) श्रेणी की उपज का पृथक पंजी संधारित किया जाएगा तथा यदि कोई स्कंध नॉन-एफएक्यू पाया जाता है तो उसका नमूना पूर्ण विवरण सहित सुरक्षित रखा जाएगा, जिससे किसी भी विवाद की स्थिति में पुनः परीक्षण कर आवश्यक निराकरण किया जा सके।
निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी स्थिति में नॉन-एफएक्यू श्रेणी की उपज का उपार्जन नहीं किया जाएगा। साथ ही सभी उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छाया, बैठक व्यवस्था सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा संपूर्ण उपार्जन प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित एवं समयबद्ध ढंग से संपादित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।
