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विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस पर गुना पुलिस एवं जिला प्रशासन का संयुक्त जनजागरूकता अभियान

 विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस पर गुना पुलिस एवं जिला प्रशासन का संयुक्त जनजागरूकता अभियान



*चांचौड़ा में मानव तस्करी, नशा, साइबर अपराध एवं सड़क सुरक्षा पर आमजन को किया जागरूक*


*"मानव तस्करी की सूचना निडर होकर दें, पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी" – कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल*


*"नशे के विरुद्ध जनभागीदारी ही सबसे प्रभावी हथियार, मांग रुकेगी तो आपूर्ति भी थमेगी" – पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल*


               दिनांक 30 जुलाई 2026 विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर गुना पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से जिले के चांचौड़ा स्थित कम्युनिटी हॉल में संयुक्त रूप से एक व्यापक जन जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया । शिविर में मानव तस्करी, नशा, सड़क सुरक्षा एवं साइबर अपराध जैसे गंभीर सामाजिक विषयों पर नागरिकों को जागरूक करते हुए समाज की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया गया ।


               कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल एवं कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल मुख्य रूप से उपस्थित रहे । इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभिषेक दुबे, एसडीएम श्री अमित सोनी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, विभिन्न विभागों के अधिकारी, पुलिस अधिकारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे ।


               कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव तस्करी एवं नशा दोनों ही समाज के लिए गंभीर चुनौतियां हैं, जिनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पुलिस लगातार अभियान चलाकर कार्यवाही कर रही है । उन्होंने कहा कि गांव स्तर पर सरपंच, सचिव एवं आम नागरिकों के पास महत्वपूर्ण सूचनाएं होती हैं । यदि प्रत्येक नागरिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर सूचना उपलब्ध कराए तो ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है । साथ ही नशे से दूरी है जरूरी 2.0 अभियान  से अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि "जब समाज नशे की मांग को समाप्त कर देगा, तब उसकी आपूर्ति भी स्वतः रुक जाएगी ।" इसलिए प्रत्येक नागरिक को स्वयं नशे से दूर रहकर अपने परिवार एवं समाज को भी नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करना होगा ।


               इस दौरान गुना कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने अपने संबोधन में कहा कि मानव तस्करी केवल एक अपराध नहीं, बल्कि मानवता के विरुद्ध सबसे अमानवीय एवं जघन्य कृत्यों में से एक है । उन्होंने कहा कि कमजोर एवं असहाय लोगों का शोषण कर उन्हें अमानवीय परिस्थितियों में जीवन जीने के लिए विवश करना अत्यंत चिंताजनक है । उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन एवं पुलिस के संयुक्त प्रयासों से संचालित विशेष अभियान के प्रथम चरण में 14 तथा द्वितीय चरण में 52 पीड़ितों को मानव तस्करी के चंगुल से मुक्त कराया गया है । इन सभी को सुरक्षित पुनर्वास हेतु "अपना घर आश्रम" भेजा गया, जहां उनके पुनर्वास एवं सामान्य जीवन में वापसी के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं । उन्होंने बताया कि अभियान के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और कई पीड़ित अब सम्मानजनक जीवन की ओर लौट रहे   हैं ।


               इस अवसर पर नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि कई बार लोगों को अपने आसपास होने वाली संदिग्ध गतिविधियों अथवा मानव तस्करी से जुड़े अपराधों की जानकारी होती है, लेकिन भय अथवा संकोचवश वे सूचना नहीं देते । इसके लिए स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया कि मानव तस्करी या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी तथा प्रशासन हर स्तर पर उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा । कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने हाथ उठाकर भविष्य में ऐसी किसी भी जानकारी को तत्काल पुलिस एवं प्रशासन तक पहुंचाने का संकल्प लिया ।


               सड़क सुरक्षा पर संवाद करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में जिले में 600 से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की मृत्यु हुई, जिनमें 419 लोगों की मौत सिर में गंभीर चोट लगने तथा हेलमेट नहीं पहनने के कारण हुई । इसलिए हेलमेट पहनना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि स्वयं एवं अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है ।


               साइबर सुरक्षा के संबंध में नागरिकों को जागरूक करते हुए कहा कि वर्तमान समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी एवं साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं । इसलिए किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें तथा यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है तो तत्काल भारत सरकार की साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते खाते को फ्रीज कर आर्थिक नुकसान से बचा जा सके ।


               कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं आमजन ने सामूहिक रूप से नशामुक्ति की शपथ ली । सभी ने स्वयं नशे से दूर रहने, अपने परिवार एवं समाज को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा मानव तस्करी, साइबर अपराध एवं अन्य सामाजिक बुराइयों के विरुद्ध पुलिस एवं प्रशासन का सक्रिय सहयोगी बनने का संकल्प लिया ।


               यह जनजागरूकता शिविर केवल एक औपचारिक कार्यक्रम न होकर सामाजिक सहभागिता, जनविश्वास एवं पुलिस-प्रशासन के समन्वित प्रयासों का सशक्त उदाहरण बना, जिसने मानव तस्करी, नशामुक्ति, सड़क सुरक्षा एवं साइबर सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर नागरिकों को जागरूक कर सुरक्षित, सजग एवं उत्तरदायी समाज के निर्माण का प्रभावी संदेश दिया ।

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