म.प्र.जागरूक युवा संगठन ने उठाए गंभीर सवाल।
अनुबंध समाप्त होने के बाद भी सचिन मसीह किस नियम के तहत डूडा में परियोजना अधिकारी के रूप में कर रहे हैं शासकीय कार्य?
सागर। मध्यप्रदेश जागरूक युवा संगठन ने जिला शहरी विकास अभिकरण (डूडा), सागर में कार्यरत सचिन मसीह के मामले में शासन एवं प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।संगठन के जिला प्रभारी मनोज कुमार अहिरवार ने कहा कि दीनदयाल अन्त्योदय योजना-राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) की अवधि 30 सितम्बर 2024 को समाप्त हो चुकी है। संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के निर्देशों के अनुसार सिटी मिशन मैनेजर एवं अन्य संबंधित संविदा अधिकारियों के अनुबंध भी समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद सचिन मसीह द्वारा जिला शहरी विकास अभिकरण (डूडा), सागर में शासकीय कार्य किए जा रहे हैं।संगठन ने प्रश्न उठाया है कि आखिर सचिन मसीह किस नियम,किस शासनादेश अथवा किस सक्षम अधिकारी के आदेश के तहत डूडा में परियोजना अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं,जबकि उनकी संविदा समाप्त हो चुकी है और योजना की अवधि भी 30 सितम्बर 2024 को समाप्त हो चुकी है। यदि कोई वैध शासकीय आदेश उपलब्ध है तो उसे सार्वजनिक किया जाए,अन्यथा स्पष्ट किया जाए कि किस आधार पर उनसे शासकीय कार्य कराए जा रहे हैं।मनोज कुमार अहिरवार ने कहा कि सागर जिला मुख्यालय पर जिला प्रशासन की नाक के नीचे बिना वैध अनुबंध एवं बिना किसी सक्षम शासकीय आदेश के एक संविदा समाप्त अधिकारी द्वारा परियोजना अधिकारी के रूप में शासकीय कार्य किया जाना अत्यंत गंभीर विषय है। इससे शासन के आदेशों, प्रशासनिक पारदर्शिता एवं वित्तीय अनुशासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।मध्यप्रदेश जागरूक युवा संगठन ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर सचिन मसीह को तत्काल शासकीय कार्यों से पृथक किया जाए, 30 सितम्बर 2024 के बाद दिए गए वेतन, मानदेय एवं अन्य वित्तीय लाभों की जांच कर नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाए तथा इस प्रकरण में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी निर्धारित कर उनके विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो मध्यप्रदेश जागरूक युवा संगठन जनहित में लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली समस्त परिस्थितियों की पूर्ण जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।
