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आलेख शीर्षक # श्रावण मास (सावन): पौराणिक कथाएं, धार्मिक महत्व और पूजन नियम

 आलेख 

शीर्षक 

# श्रावण मास (सावन): पौराणिक कथाएं, धार्मिक महत्व और पूजन नियम



- लेखिका गरिमा सिंह अजमेर राजस्थान ✍️ 


हिंदू धर्म में **श्रावण मास (सावन)** को सबसे पवित्र और फलदायी महीनों में से एक माना गया है। यह पूरा महीना देवाधिदेव महादेव (भगवान शिव) को समर्पित होता है। मानसून की पहली फुहारों के साथ आने वाला यह महीना केवल भक्ति और अध्यात्म का ही नहीं, बल्कि प्रकृति के नए रूप और उमंग का भी प्रतीक है।

आइए विस्तार से जानते हैं सावन मास का धार्मिक महत्व, इससे जुड़ी पौराणिक कथाएं और इस दौरान अपनाए जाने वाले नियम।

## 1. श्रावण मास की पौराणिक कथाएं

### (क) समुद्र मंथन और शिवजी का 'नीलकंठ' स्वरूप

सावन मास की सबसे प्रचलित पौराणिक कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है:

 * **हलाहल विष की उत्पत्ति:** जब देवों और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो सबसे पहले अत्यंत जहरीला 'हलाहल विष' निकला। इस विष की तपन से पूरा ब्रह्मांड जलने लगा।

 * **सृष्टि की रक्षा:** सृष्टि को विनाश से बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष को स्वयं पी लिया।

 * **'नीलकंठ' नाम:** माता पार्वती ने विष को शिवजी के गले से नीचे नहीं उतरने दिया, जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे **नीलकंठ** कहलाए।

 * **जलाभिषेक की शुरुआत:** विष के प्रभाव और उसके ताप को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव पर शीतल जल और गंगाजल अर्पित किया। माना जाता है कि यह घटना सावन मास में ही हुई थी, इसीलिए इस महीने में शिवजी का जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है।

### (ख) माता पार्वती और शिवजी का पुनर्मिलन

पुराणों के अनुसार, माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में अपने देह का त्याग कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हिमालय राज के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया।

 * **कठोर तपस्या:** शिवजी को पुनः पति रूप में प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने वर्षों तक निराहार रहकर सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी।

 * **मनोकामना पूर्ति:** उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने सावन के महीने में ही उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया।

 * यही कारण है कि सावन में सोमवार का व्रत रखने से मनचाहे जीवनसाथी की प्राप्ति होती है और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है।

## 2. सावन मास का महत्व

सावन का महीना धार्मिक, प्राकृतिक और स्वास्थ्य—तीनों ही दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है:

### 🕉️ धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

 * **शिवजी का पृथ्वी प्रवास:** मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान विष्णु चातुर्मास के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान भगवान शिव ही सृष्टि का संचालन करते हैं और पृथ्वी पर निवास करते हैं।

 * **अक्षय पुण्य की प्राप्ति:** इस महीने में की गई भक्ति, जाप और दान का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।

### 🌿 प्राकृतिक एवं वैज्ञानिक (आयुर्वेदिक) महत्व

 * **प्रकृति का नवजीवन:** भीषण गर्मी के बाद सावन की बारिश से सूखी धरती हरी-भरी हो उठती है, जो जीवन और सृजन का प्रतीक है।

 * **स्वास्थ्य और डिटॉक्स:** आयुर्वेद के अनुसार, वर्षा ऋतु में शरीर की पाचन शक्ति (जठराग्नि) मंद पड़ जाती है। सावन में व्रत रखने, हल्का सात्विक भोजन करने और फलाहार करने से शरीर स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स (शुद्ध) होता है।

## 3. सावन सोमवार व्रत और पूजा विधि

सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखने और विधि-विधान से पूजन करने का विशेष विधान है:

 1. **प्रातः स्नान:** सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

 2. **संकल्प:** घर के मंदिर में दीप जलाकर सावन सोमवार व्रत का संकल्प लें।

 3. **शिवलिंग अभिषेक:** मंदिर जाकर शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, शक्कर और गंगाजल (पंचामृत) से अभिषेक करें।

 4. **सामग्री अर्पण:** इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, सफेद फूल और भस्म अर्पित करें।

 5. **मंत्र एवं आरती:** *"ॐ नमः शिवाय"* मंत्र का जप करें, सावन सोमवार की व्रत कथा सुनें या पढ़ें और अंत में आरती करें।

## 4. सावन में ध्यान रखने योग्य मुख्य नियम

 * **सात्विक जीवन:** सावन के महीने में तामसिक भोजन (प्याज़, लहसुन, मांसाहार) और मदिरा से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।

 * **सकारात्मक विचार:** मन में किसी के प्रति क्रोध, ईर्ष्या या कटु विचार न लाएं।

 * **व्रत में खान-पान:** व्रत रखने वालों को सेंधा नमक, फल, कूटू का आटा और साबूदाना जैसी सात्विक चीजों का ही सेवन करना चाहिए।

## निष्कर्ष

श्रावण मास केवल एक धार्मिक त्योहार या महीना भर चलने वाला अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने, मन को शांत करने और प्रकृति के साथ जुड़ने का पावन अवसर है। यदि सच्चे मन और निष्ठा से इस महीने में भगवान शिव की आराधना की जाए, तो जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

**हर हर महादेव!**

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