जीवन में जिसे सफल होना है उसे पुण्य चाहिए।श्रमण धारा प्रवचन माला में मुनि श्री के प्रेरणादायी प्रवचन
राघौगढ़ 21 जुलाई ।धर्म नगरी राघौगढ़ की पुण्य धरा पर विराजमान तपस्वी संत मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने श्रवण धारा प्रवचन माला की श्रृंखला में आज जीवन में पुण्य बढ़ाने पर प्रेरक प्रवचन दिये।
आचार्य विद्यासागर सभागार राघौगढ़ में विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिराज ने कहा जीवन में सफल होना है तो हमें पुण्य चाहिए। बिना पुण्य के भीख एवं सीख नहीं मिलती है। आपने आगे कहा दुनिया में हम जितने अच्छे काम करेंगे उनका पुण्य फल हमें मिलेगा। आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने अपनी दिव्य देशना में जीवन में पुण्य बढ़ाने के चार अमूल्य सूत्र दिए हैं पहला सूत्र प्रातः काल मंदिर पहुंचकर भगवान की पूजन करना है। आपने कहा आज स्थिति यह है कि जैन कुल में जन्म लेकर भी आज की पीढ़ी को अपने जैन होने का गौरव पता नहीं है ।दूसरा सूत्र है सुपात्र को दान देकर पुण्य प्राप्त करना। दिगंबर मुनि पीछी कमंडल धारी को आहार देना महान पुण्य का कारण है। तीसरा सूत्र है व्रत धारण कर आचरण करना। मुनिराज ने कहा एक छोटा सा नियम आपको भगवान बना सकता है। चौथा सूत्र है उपवास करना, आत्म कल्याण की भावना से उपवास करने से पुण्य का संचय होता है। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने धर्म सभा में आव्हान किया कि हम इस मानव जीवन में पाप को त्याग कर पुण्य संचय में अपने जीवन को लगाये इसी से आत्म कल्याण होगा।
प्रवचन सभा का शुभारंभ दिगंबर जैन आचार्य इस शदी के महान संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज की सामूहिक पूजन से हुआ। सभा का संचालन कर रहे विकास कुमार जैन ने उल्लेख किया राघौगढ़ नगर गौरव मुनि निर्लेप सागर जी महाराज के नाम से इस नगरी की दुनिया में पहचान बनी है। आचार्य समय सागर जी महाराज की विशेष कृपा से राघौगढ़ नगर वासियों को जीवन में पहली बार मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज का पावन चातुर्मास मिला है। आपने सभी से आग्रह किया कि महाराज जी का सानिध्य प्राप्त कर चातुर्मास में धर्म आराधना करें।
