किसान पर्याप्त नमी होने पर ही करें उर्वरक व खरपतवारनाशी का उपयोग
गुना
उपसंचालक कृषि श्री संजीव शर्मा ने बताया हैं कि खरीफ फसलों हेतु खेतो में पर्याप्त नमी होने के पश्चात ही नींदानाशक दवाओं का छिडकाव करें। खरीफ फसल की मांग अनुसार यूरिया उर्वरक का संतुलित मात्रा में उपयोग पर्याप्त नमी की दशा में ही करें। सभी किसान भाई मौसम एप, मेघदूत, दामनी एप का उपयोग कर अपने क्षेत्र के मौसम पूर्वानुमान, बिजली गिरने, अतिवृष्टि, सूखा की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते है। निदाई, गुड़ाई तथा कुलपा चलाकर नमी संरक्षण हेतु अन्तकर्षण क्रियाओं द्वारा खेत की नमी संरक्षित करने का कार्य करें। कृषि विभाग द्वारा कृषकों को प्रशिक्षण, प्रेसनोट आदि के द्वारा नमी संरक्षण एवं उचित फसल प्रबंधन की सलाह दी जा रही है। 15 से 20 दिन की फसल में निदाई, गुड़ाई, डोरा एवं कुलपा करने के बाद, 5 टन प्रति हेक्टेयर की दर से फसल अवशेषों को बिछाकर मल्चिंग करें, जिससे खेतों में नमी संरक्षित रहेगी। मिट्टी में उपलब्ध नमी एवं मौसम को ध्यान में रखते हुये भूमि में दरार पड़ने के पूर्व ही, जहाँ सिंचाई की उपलब्धता है, वह कृषक फसलों की जीवन रक्षक सिंचाई करें। मल्चिंग के द्वारा नमी संरक्षण एवं खरपतवार प्रबंधन का कार्य करें। कृषि रसायनों के अत्यधिक अनुप्रयोग से बचें।
कृषक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अपनी फसल का बीमा कराकर मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में इस योजना का लाभ लें। खरीफ वर्ष 2026 में खरीफ फसलों का बीमा कराने हेतु पोर्टल पर प्रीमियम नामे कर बीमांकन करने हेतु प्रविष्टि की अंतिम तिथि ऋणी कृषकों हेतु दिनांक 15 अगस्त 2026 तथा अऋणी कृषकों हेतु दिनांक 31 जुलाई 2026 नियत है। खरीफ 2026 में अल-नीनो के प्रभाव के कारण प्रतिकूल मौसम होने का अनुमान है। जिले में संभावित प्रतिकूल मौसम को दृष्टिगत रखते हुये जिले में कम वर्षा एवं सूखे की स्थिति निर्मित होने की आशंका है। जिले के कृषक अपनी खरीफ फसलों का बीमा अधिक से अधिक करायें।
