संत की अंतिम कमजोरी होती है ख्याति के पीछे भागना।
राघौगढ़ 5 अगस्त। आचार्य विद्यासागर भवन राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला के अंतर्गत "आदमी की कीमत" विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए महान तपस्वी बुंदेली महाकवि प्रखर वक्ता मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने आदमी को आज ज्ञान नहीं है कि कौंन सा कदम उठाने के लिए समय उपयुक्त होगा तब तक उस आदमी की कीमत नहीं होती है। आपने कहा आपकी व्यवहारिक कीमत बढ़े इस विषय पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उदाहरण देते हुए कहा तीन सगे भाई ऊपर से एक से देखते हैं, जरूरी नहीं है कि वह अंदर से भी एक से हों।
आज हम सत्य तो बोल देते हैं मगर यह ध्यान नहीं रखते हैं कि सत्य को उद्घाटित करने का समय कौन सा उपयुक्त है। वर्तमान में हर व्यक्ति ख्याति लाभ की ओर बढ़ रहा है अपने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के प्रवचनों का उल्लेख करते हुए कहा आचार्य जी ने कहा था संत की अंतिम कमजोरी है ख्याति के पीछे भागना।
मुनि श्री ने कहा सत्य परेशान होता है सत्य हारता नहीं है। सत्य को निडर होकर कहने के लिए साहस चाहिए, तरीका चाहिए और सत्य को किस समय पर कहना है यह विवेक भी होना चाहिए। आपने कहा आपका जन्म जैन कुल में हुआ है। मगर आपको इसका गर्व नहीं है कि मैं जैन हूं। आपके पड़ोस में जो रहते हैं वह गर्व से कहते हैं कि हमारे पड़ोसी जैन है। जैन कुल में जन्म लेकर जैन धर्म के अनुरूप आचरण करने की प्रेरणा मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने धर्म सभा में दी।
राघौगढ़ नगर में मुनि श्रमण सागर जी, मुनि ओंकार सागर जी महाराज का चातुर्मास अपूर्व धर्म प्रभावना के साथ चल रहा है। प्रतिदिन प्रात 8:30 बजे से मुनिश्रमण सागर जी महाराज के मंगल प्रवचन होते हैं। श्रद्धालु पुरुष एवं महिलाएं उत्साह से प्रवचनों का लाभ ले रहे हैं।