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खोया हुआ विश्वास आचरण एवं व्यवहार से लौटता है। मुनि श्रमण सागर जी

 राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला 

खोया हुआ विश्वास आचरण एवं व्यवहार से लौटता है।           मुनि श्रमण सागर जी 


राघौगढ़ 30 अगस्त। दिगंबर जैन आचार्य, इस सदी के महान संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य महान तपस्वी बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने आज श्रमण धारा प्रवचन माला में "खोया विश्वास कैसे लौटे" इस विषय पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा प्रेम, श्रद्धा, वैराग्य, विश्वास, भक्ति, समर्पण, यह शब्द बोलने में बहुत छोटे हैं। मगर यह शब्द जबरदस्त है इन कार्यों में जबरदस्ती नहीं हो सकती। हम चाहे भी तो पैसों से विश्वास वापस नहीं प्राप्त कर सकते। हमारे व्यवहार आचरण एवं युक्ति से हम खोये हुए विश्वास को प्राप्त  कर सकते हैं। आपने आचार्य विद्यासागर जी महाराज के प्रवचन के अंश का उल्लेख करते हुए कहा क्रोध पर नियंत्रण रखो नहीं तो जिंदगी भर क्रोध के नियंत्रण में रहना पड़ेगा। वर्तमान समय की ज्वलंत समस्या का उल्लेख करते हुए आपने कहा ससुराल में बहू छोटी-मोटी बात पर क्रोधित होकर गलत कदम उठा लेती है एवं हर घटना की जानकारी अपने माता-पिता भाई भाभी को रात दिन मोबाइल के माध्यम से दे देती हैं। इस तरह की घटनाओं से परिवार टूट रहे हैं। विवाह के बाद लड़की को अपने ससुराल पक्ष को ही अपना घर मानकर उनका विश्वास जीतना चाहिए। क्रोध हमारा शत्रु है क्रोध जब आता है तो हम आगे क्या होगा यह भूल जाते हैं और विश्वास खो देते हैं क्रोध पर नियंत्रण करने का आपने मार्गदर्शन दिया। पूज्य मुनि श्रमण सागर जी महाराज राघौगढ़ में प्रतिदिन प्रवचन में स्वरचित एक कविता सुनाते हैं। आज मुनिराज ने राघौगढ़ में ही लिखित कविता, इस कविता के माध्यम से युवा पीढ़ी को जीवन में सफल होने का संदेश दिया है धर्म सभा में सुनायी "अंतिम अवसर है मत चूको अभी नहीं तो कभी नहीं।" 

                     भारतीय जैन मिलन के राष्ट्रीय संरक्षक एवं जैन समाज राघोगढ़ के मार्गदर्शक विजय कुमार जैन ने बताया है राघौगढ़ नगर में चातुर्मास कर रहे मुनि श्रमण सागर जी एवं मुनि ओंकार सागर जी महाराज के दर्शन करने जैन समाज गुना के अध्यक्ष संजय जैन कामनी के साथ कमेटी के पदाधिकारी, जैन समाज कुंभराज के नवनिर्वाचित अध्यक्ष विवेक जैन विक्की नवगठित कमेटी के साथ पधारे, छतरपुर, सागर, गंज बासौदा, विदिशा एवं महाराष्ट्र से भक्त गण पधारे। महाराज श्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। बाहर से पधारे अतिथियों का जैन समाज राघौगढ़ की ओर से सम्मान किया गया।

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