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थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय : कलेक्टर

 थैलेसीमिया की रोकथाम के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा उपाय : कलेक्टर

विवाह पूर्व एवं गर्भावस्था के दौरान थैलीसीमिया जांच कराने का किया आह्वान


गुना 

भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी एवं स्वास्थ्य विभाग गुना द्वारा मानस भवन में "थैलेसीमिया रोग के उपचार एवं रोकथाम में समाज की भूमिका" विषय पर सेमिनार आयोजित किया गया। बुधवार शाम को सेमिनार में कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने कहा कि थैलेसीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी की रोकथाम जन-जागरूकता और समय पर जांच से ही संभव है। उन्होंने विवाह पूर्व तथा गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया की जांच कराने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे आने वाली पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सकता है।


बच्चों की कोई गलती नहीं, समाज को निभानी होगी जिम्मेदारी

कलेक्टर श्री कन्याल ने कहा कि जब उन्हें थैलेसीमिया शिविर आयोजित होने की जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर इसकी व्यापक तैयारी सुनिश्चित कराई। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों की इसमें कोई गलती नहीं होती, इसलिए समाज का दायित्व है कि वह जागरूक बने और इस बीमारी की रोकथाम के लिए आगे आए। उन्होंने कहा कि विवाह से पहले ब्लड ग्रुप एवं आवश्यक जांच कराना तथा गर्भावस्था के दौरान थैलेसीमिया स्क्रीनिंग कराना भविष्य की पीढ़ी को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

अन्य जिलों से भी पहुंचे लोग, शिविर के आयोजन पर जताई खुशी

कलेक्टर ने बताया कि इस अभियान को लेकर उन्होंने अन्य जिलों के कलेक्टरों से भी चर्चा की। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि गुना के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग सेमिनार एवं शिविर में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का एकमात्र उद्देश्य यह है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से थैलीसीमिया से प्रभावित बच्चों को बेहतर उपचार और समाज को सही जानकारी मिल सके। यदि इन प्रयासों से बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर होता है, तो यही प्रशासन और रेडक्रॉस की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।


जनभागीदारी से ही संभव है थैलीसीमिया मुक्त समाज

सेमिनार में थैलेसीमिया के उपचार, रोकथाम, समय पर जांच तथा समाज की भूमिका पर विशेषज्ञों द्वारा जानकारी दी गई। उपस्थित नागरिकों से अपील की गई कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार एवं समाज में भी थैलीसीमिया जांच के प्रति लोगों को प्रेरित करें, ताकि इस बीमारी की रोकथाम प्रभावी रूप से की जा सके।

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