राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला।
शौक कपड़े बदलने का नहीं हाथों की रेखाओं को बदलने का रखो।
राघौगढ़ 7 अगस्त। प्राचीन ऐतिहासिक धर्म नगरी राघौगढ़ में चातुर्मास कर रहे महान तपस्वी ओजस्वी वक्ता बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने आज हाथों की रेखाओं पर मंगल प्रवचन करते हुए कहा हम यह मानकर विश्वास कर लेते हैं कि हाथों की रेखाओं में लिखा है वहीं होगा। इस मान्यता के कारण निठल्ले एवं निष्काम हो जाते हैं। आपने कहा दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं पहले वे जो हाथ की रेखाओं पर विश्वास कर निठल्ले एवं कामचोर हो जाते हैं। जिनका स्वयं पर भरोसा नहीं है है जीवन में कभी सफल नहीं हो सकते। दूसरे वह होते हैं जो भाग्य पर तो विश्वास करते हैं मगर प्रेरणा मिलने पर जागृत हो जाते हैं और भाग्य को बदल देते हैं। तीसरी वह व्यक्ति होते हैं उनसे कह दिया जाता है कि आपकी हाथ की रेखा में योग नहीं है। अब आगे कुछ नहीं होगा। वह व्यक्ति हाथ की रेखाओं पर विश्वास न कर पुरुषार्थ करके सफलता पाते हैं और हाथ की रेखाओं को बदल देते हैं। जिसने चुनौती पूर्वक विपरीत परिस्थिति में कार्य किया वह सफल हो गया। मुनिराज ने आगे कहा ऐसे लोगों के लिए कहावत है न गर्मी ऊन में है, न गर्मी जून में है,न गर्मी खून में है। एकमात्र गर्मी जुनून में है। जो कपड़े बदलने का नहीं हाथों की रेखाओं को बदलने का शौक रखते हैं वह एक दिन हाथों की रेखाओं को बदलकर रख देते हैं
मुनि श्रमण सागर जी महाराज प्रतिदिन प्रात 8.30 बजे से मंगल प्रवचन विद्यासागर भवन में होते हैं। इसके पूर्व प्रातः 6:45 बजे से युवक युवतियों की मोटिवेशन क्लास में उन्हें जीवन में कभी निराश नहीं होने, साहस के साथ चुनौतियों का सामना करने, लगन और मेहनत कर जीवन के हर क्षेत्र में उन्नति प्राप्त करने का मार्गदर्शन दे रहे हैं। प्रतिदिन युवक युवती मोटिवेशन क्लास में उत्साह से भाग ले रहे हैं।
