राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
पड़ौसी से जलो मत पुरुषार्थ कर बराबरी करो।
मुनि श्रमण सागर जी महाराज के प्रेरक प्रवचन।
राघौगढ़ 3 अगस्त। धर्मनगरी राघौगढ़ में चातुर्मास कर रहे तपस्वी बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा मैं आपको सही दिशा में चलने का मार्गदर्शन दे रहा हूं। आज हर व्यक्ति की यह स्थिति हो गई है कि हम से कोई एक कदम आगे चला गया है तो हमें उसे जलन महसूस होने लगती है। यहां माचिस की जरूरत नहीं होती है आदमी आदमी से जल रहा है। जीवन के हर क्षेत्र में एक दूसरे के प्रति जल एवं कुंठा निरंतर बढ़ती जा रही है। हम दूसरे की लाइन को मिटाने की अपेक्षा अपनी लाइन इतनी बड़ी करें कि दूसरे की लाइन छोटी हो जाए। सामने वाले के प्रति उसकी बढ़ती उपलब्धि पर जलन छोड़कर सबसे पहले हम यह देखें की वह क्या कारण है कि वह निरंतर प्रगति पर है। उसने जो साधन अपना कर प्रगति की है उन्हें भी हम स्वीकार करें और उसके अनुरूप चलकर जीवन में प्रगति करें। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा कि हमें इस सदी के महान संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेना चाहिए कि कर्नाटक राज्य के एक छोटे से गांव शदलगा में जन्म लेकर उन्होंने दुनिया में ख्याति पाई और इतना बड़ा आचार्य संघ बनाया है। आचार्य श्री ने कभी किसी की लाइन मिटाने करने का प्रयास नहीं किया। आपने कहा हमने चलने लिये रास्ता
नहीं देखा। हमें तो आचार्य जी के कदमों के निशान मिले गये और हम चल पड़े।
मुनि श्रमण सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में जैन धर्मशाला राघौगढ़ में प्रतिदिन प्रातः 6:45 बजे से युवक युवतियों की मोटिवेशन क्लास चल रही है। इस क्लास में मुनिराज युवक युवतियों को जीवन में कैसे सफल हो एवं जीवन में कभी निराश न हो यह प्रेरक मार्गदर्शन दे रहे हैं मोटिवेशन क्लास में युवक युवतियां उत्साह से भाग ले रहे हैं।
