राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला
अति चिंतन से बचना आज के समय की आवश्यकता।
राघौगढ़ 17 अगस्त। विद्या समय रत्न, महान तपस्वी, प्रखर वक्ता, बुंदेली महाकवि मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने धर्मनगरी राघौगढ़ में श्रमण धारा प्रवचन माला के अंतर्गत आज मंगल प्रवचन करते हुए कहा अति चिंतन, ज्यादा सोचना या कहें ओवर थिंकिंग वर्तमान में एक बड़ी समस्या बन गई है। ज्यादा सोचना, ज्यादा भोजन, ज्यादा बोझ यह सभी समस्याओं के कारण है। आपने पुराना सूत्र सुनाते हुए कहा "अति सर्वत्र वर्जते"।
यह भी कहा बिना बेचारे जो करे सो पीछे पछताए। मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने कहा हमारा सही दिशा में है तो हम देश की दशा और दिशा बदलने की क्षमता रखते हैं।हमें ज्यादा सोच विचार न कर जल्दी उचित निर्णय लेना चाहिए। आपने आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के कहे गए वचनों का उल्लेख करते हुए कहा नदी के प्रभाव को रोकने की बजाय नदी के प्रभाव की दिशा बदलने की आवश्यकता है। वर्तमान में विद्यार्थी कक्षा 10 उत्तीर्ण कर कक्षा 11 में प्रवेश लेने से पूर्व यह निर्णय नहीं ले पाते हैं कि आगे विज्ञान की पढ़ाई करूं या वाणिज्य की पढ़ाई करूं। इस विषय पर अनिश्च की स्थिति में गहरी सोच में डूब जाते हैं। इससे मानसिक तनाव बढ़ जाने से अवसाद स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
मुनि श्रमण सागर जी महाराज ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा अति चिंतन पर प्रवचन करने का यह मेरा विषय आप सभी को यह अवगत कराना है कि अति चिंतन दुखदाई है। अति चिंतन ज्यादा सोच अथवा ओवरथिंकिंग से बचने के लिए अपने मार्गदर्शन दिया कि हमें विषय का ज्ञान है तो अति चिंतन से बचना है हमारे अंदर शीघ्र निर्णय की क्षमता होना चाहिए। किसी विषय पर हमने निर्णय ले लिया है तो उसे निर्णय का दृढ़ता से पालन करना चाहिए इन उपायों से ही हम अति चिंतन ज्यादा सोच अथवा ओवर थिंकिंग से बच सकेंगे।
