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माखनलाल यूनिवर्सिटी में SC-ST प्रतिनिधित्व गायब, प्रदीप अहिरवार बोले- ‘RSS की मानसिकता से घिरा पूरा विश्वविद्यालय’

माखनलाल यूनिवर्सिटी में SC-ST प्रतिनिधित्व गायब, प्रदीप अहिरवार बोले- ‘RSS की मानसिकता से घिरा पूरा विश्वविद्यालय’


पत्रकारिता विश्वविद्यालय के मंच पर सामाजिक न्याय बेआवाज! SC-ST प्रतिनिधित्व नहीं होने पर कांग्रेस का तीखा हमला




भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में 18 से 20 अगस्त तक आयोजित नवागत विद्यार्थियों के प्रबोधन कार्यक्रम में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी कार्यक्रम की वक्ताओं की सूची में बड़ी संख्या में लोगों को आमंत्रित किया गया है, लेकिन अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से किसी वक्ता का स्पष्ट प्रतिनिधित्व दिखाई नहीं देता। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और निंदनीय है।


अहिरवार ने कहा कि पत्रकारिता एवं संचार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में विद्यार्थियों को समाज के सभी वर्गों की आवाज और अनुभवों से परिचित कराना विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी है। जब किसी सार्वजनिक विश्वविद्यालय के इतने बड़े कार्यक्रम में समाज के वंचित और ऐतिहासिक रूप से कम प्रतिनिधित्व वाले वर्गों को मंच पर स्थान नहीं मिलता, तो कार्यक्रम की चयन प्रक्रिया और संस्थान की सामाजिक सोच पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय केवल भाषणों और किताबों का विषय नहीं, बल्कि संस्थानों के व्यवहार और कार्यक्रमों में भी दिखाई देना चाहिए।


कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि माखनलाल विश्वविद्यालय का पूरा वातावरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित दिखाई देता है और इसी मानसिकता का असर कार्यक्रम की वक्ता सूची में भी नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय में सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी सोच को महत्व दिया जाता, तो कार्यक्रम में दलित और आदिवासी समाज से आने वाले पत्रकारों, शिक्षाविदों, लेखकों और विशेषज्ञों को भी विद्यार्थियों से संवाद का अवसर दिया जाता। उन्होंने कहा कि यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष की योग्यता पर नहीं, बल्कि वक्ताओं के चयन की प्रक्रिया और सामाजिक प्रतिनिधित्व की नीति पर है।


प्रदीप अहिरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समाज की बड़ी आबादी है। इसके बावजूद इन वर्गों की आवाज को विश्वविद्यालय के इतने महत्वपूर्ण मंच से दूर रखना गंभीर विषय है। उन्होंने सवाल किया कि क्या विश्वविद्यालय को इन वर्गों से कोई योग्य पत्रकार, लेखक, शिक्षाविद या विशेषज्ञ नहीं मिला? उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य समाज के हर वर्ग की आवाज को सामने लाना है, इसलिए पत्रकारिता की शिक्षा देने वाले संस्थान के मंच पर भी समाज की वास्तविक विविधता दिखाई देनी चाहिए।


अहिरवार ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, लोकसभा में नेताप्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार सामाजिक न्याय, जातिगत जनगणना और सभी वर्गों को उनकी आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिए जाने की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश में कोई कुछ भी कर ले, जातिगत जनगणना होकर रहेगी और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिसकी जितनी संख्या है, उसे उसी अनुपात में अवसर और प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यह किसी वर्ग पर एहसान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान भागीदारी का अधिकार है।


मध्यप्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से मांग की है कि वह स्पष्ट करे कि कार्यक्रम के लिए वक्ताओं के चयन की प्रक्रिया क्या रही और सामाजिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए। अहिरवार ने कहा कि भविष्य में विश्वविद्यालय के कार्यक्रमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग तथा समाज के अन्य वंचित वर्गों से योग्य वक्ताओं को उचित अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारिता जैसे महत्वपूर्ण संस्थान के मंच पर सामाजिक न्याय और समान अवसर दिखाई नहीं देंगे तो कांग्रेस इस मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से लगातार उठाती रहेगी।


कार्यालय प्रभारी 

मध्यप्रदेश कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग, भोपाल

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