बरसात में उल्टी-दस्त, बुखार एवं सर्पदंश से बचाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी
गुना
कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर द्वारा बताया गया कि वर्तमान में मौसम में बदलाव के साथ बरसात में उल्टी-दस्त, बुखार के साथ ही सर्पदंश की घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना प्रबल होती है।
उल्टी-दस्त, बुखार :- विशेष तौर से बरसात के मौसम में आम बीमारी है जो मुख्य रूप से बरसात का पानी पेयजल स्त्रोतों में मिल जाने से खुले नदिया नाले एवं कुंआ का पानी पीने से साथ ही दूषित, बासा भोजन करने के कारण होते हैं। इनसे बचाव के लिए पीने के पानी को 10-15 मिनिट तक उबालें एवं ठंडा कर पीयें। खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ पानी एवं साबुन से अच्छी तरह से धोंए। हमेशा ताजा एवं गर्म भोजन करें एवं भोजन को ढककर रखें। नदी, तालाब या खुले कुंए का पानी न पीयें। बाजार में खुले में रखी मिठाईयां या अन्य खाद्य सामग्री, कटे हुए फल, कटी हुई सब्जियों का उपयोग खाने में न करें। पीने के पानी के स्त्रोतों के आसपास कूढा करकट न फेंके न ही गंदगी करें। उल्टी दस्त होने पर ओ. आर.एस. का घोल पीयें। ओ.आर.एस. घोल बनाने हेतु 1 लीटर साफ पानी को उबालकर एवं ठंडा होने के उपरांत उसमें 1 पैकेट ओ.आर.एस. डालें एवं 24 घंटे के बाद उक्त घोल का उपयोग पीने में न करें फिर से नवीन घोल बनाकर उसका उपयोग पीने में करें। बरसात के मौसम में बुखार भी आम बीमारी है जो मच्छर के काटने से होती है। बरसात के मौसम में जगह-जगह साफ पानी जमा हो जाता है जिसमें मलेरिया, डेंगू एवं अन्य बुखार के मच्छर के लार्वा पनपते हैं। इसलिए घरों में एवं घरों के आसपान पानी बरसात का जानी जमा न होने दें उसके निष्कासन की उचित व्यवस्था करें। बुखार आने पर नजदीकी उपस्वास्थ्य केन्द्र, प्राथ.स्वा.केन्द्र, सामु.स्वा.केन्द्र, सिविल अस्पताल एवं जिला चिकित्सालय में चिकित्सीय परामर्श लेकर बुखार की जांच एवं उपचार प्राप्त करें।
सर्पदंश की घटनायें: बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनायें बढने की प्रबल संभावनायें होती हैं। सर्पदंश से बचाव हेतु बाहर निकलते समय पैरों को ढकने वाले जूते पहनें। रात में बाहर निकलते समय टार्च का उपयोग करें। जहां हाथ और पैर रखें उस जगह को पहले अच्छे से देख लें। फर्श पर न सोयें और मच्छरदानी को अच्छे से दबाकर सोएं। घर और आसपास के परिवेश को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखें। चूहों की जनसंख्या को नियंत्रित करें।
सर्पदंश होने की स्थिति में घवरायें नहीं सर्पदंश की चिकित्सा हो सकती है। झाड फूक न करवायें न ही सांप को मारने या पकडने का प्रयास करें। सर्पदंश वाले हिस्से को न ही काटें न ही चूसें, सर्पदंश वाले हिस्से पर रक्त रोधी पट्टी न बांधें न ही बर्फ का इस्तेमाल करें और न ही मालिश करें इससे और भी नुकसान हो सकता है। खुद ही इलाज न करें और न ही किसी जडी बूटी का उपयोग करें। इससे कोई लाभ नहीं होता। सर्पदंश होने पर बगैर समय गवाए तत्काल मरीज को नजदीकी प्राथ.स्वा. केन्द्र, सामु.स्वा. केन्द्र, सिविल अस्पातल या जिला चिकित्सालय लेकर जांए जहां चिकित्सीय परामर्श लेकर मरीज का उपचार करावें। इन संस्थाओं में सर्पदंश से बचाव हेतु एंटी स्नेक बीनम उपलब्ध है।
